आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आज 134वीं जयंती है। पूरा देश बाल दिवस के जरिए नेहरू को याद कर रहा है। एक ओर जहां छोटे बच्चे टोपी, जैकेट की ऊपरी जेब में गुलाब लगाकर स्कूल पहुंचे होंगे। वहीं, राजनीतिक गलियारों में भारत के प्रथम कप्तान की नीतियों पर चर्चाएं छिड़ी होंगी।
हमारे देश में तो कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़ाव होने के चलते उन्हें ‘पंडित नेहरू’ कहा गया। वहीं, बच्चों ने उन्हें ‘चाचा नेहरू’ कहकर संबोधित किया। हालांकि, बेहद कम ही लोग जानते होंगे कि जिन अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने आगे चलकर अभियान चलाए। उन्हीं अंग्रेजों ने स्कूल के दौरान नेहरू को खास निकनेम ‘जो नेहरू’ भी दे दिया था।
लेखक बेंजामिन जकारिया अपनी किताब ‘नेहरू’ में लिखते हैं कि पिता मोतीलाल नेहरू 1899-1900 में इंग्लैंड गए थे। साल 1905 में वह अपनी गर्भवती पत्नी, बेटे और बेटी विजयलक्ष्मी को भी साथ ले गए। इस बार वह बेटे का दाखिला किसी पब्लिक स्कूल में कराना चाहते थे। यहां से जेएन नेहरू का हैरो स्कूल का सिलसिला शुरू हुआ।
यहां जवाहर लाल नेहरू के विदेशी दोस्तों ने उन्हें ‘जो’ नाम दिया। किताब के मुताबिक, नेहरू अच्छे छात्र थे। वह फ्रेंच और गणित के बढ़िया छात्र थे और लैटिन में भी ठीक थे। इस दौरान उन्होंने जर्मन भाषा भी सीखी थी। ब्रिटैनिका के अनुसार, 16 साल की आयु तक घर पर ही शिक्षा हासिल करने के बाद वह हैरो स्कूल गए और बाद में ट्रिनिटि कॉलेज का रुख किया।
14 नवंबर 1889 में इलाहबाद (अब उत्तर प्रदेश के प्रयागराज) में जन्मे नेहरू ने प्रधानमंत्री के तौर पर साल 1950 से भारतीय गणराज्य की कमान संभाली। 27 मई 1964 को उन्होंने दिल्ली में अंतिम सांस ली।