कारीगरों को वितरित किये गए टूल किट

– पौड़ी में ग्रामीण कारीगरों को सशक्त बनाने की पहल

पौड़ी। सामाजिक सरोकार को लेकर ग्रामीण हस्तशिल्प क्षेत्र को सशक्त बनाने और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। ग्रामीण रोजगार संस्थान ने भारत सरकार, वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के अंतर्गत संचालित उप-योजना के तहत उन्नत टूलकिट का वितरण किया गया।

पाबौ बाजार (पौड़ी) में आयोजित कार्यक्रम में 50 चयनित कारीगरों को आधुनिक एवं उन्नत टूलकिट वितरित की गई। इन टूलकिटों में ऐसे उपकरण सम्मिलित हैं जो कारीगरों को उनके कार्य में गुणवत्ता सुधार, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जोड़ते हुए कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना है। सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) नितिन राय विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कारीगरों का मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि भारत सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि कारीगरों को दीर्घकालिका रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कारीगरों को गुणवत्ता, डिज़ाइन नवाचार और बाजार उन्मुख उत्पादन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। राय ने कहा कि उत्तराखंड़ का हस्तशिल्प देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है और यदि कारीगर आधुनिक उपकरणों व प्रशिक्षण का समुचित उपयोग करें तो वे बड़े बाजारों तक अपनी पहुँच बना सकते हैं।
इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह भंडारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के कारीगरों में अपार प्रतिभा है, किंतु संसाधनों की कमी उनके विकास में बाधा बनती है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की योजनाएं कारीगरों को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाती हैं। उन्होंने सभी कारीगरों से प्राप्त टूलकिट का सदुपयोग करने और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने का आह्वान किया। उपस्थित अतिधियों ने कारीगरों की प्रतिभा की सराहना की और उनके उन्नत भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में डिज़ाइनर इशिता रस्तोगी एवं मास्टर क्राफ्ट पर्सन अनीता नेगी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कारीगरों को तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक डिज़ाइन की जानकारी तथा उत्पाद विविधीकरण के विषय में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने पारंपरिक कला को संरक्षित रखते हुए उसमें नवाचार जोड़ने पर बल दिया, ताकि स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सके। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा हस्तशिल्प क्षेत्र की नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। टूल किट प्राप्त करने वाले कारीगरों ने इस पहल के लिए भारत सरकार एवं रूप ग्रामीण रोजगार संस्थान का आभार व्यक्त किया। कारीगरों ने कहा कि आधुनिक उपकरण मिलने से उनके कार्य में गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा, जिरारी आय में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय कारीगरों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

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