- ग्राफिक एरा में वेस्ट मैनेजमेंट व हरित विकास पर मंथन
देहरादून। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और अंतरराष्ट्रीय अपशिष्ट प्रबंधन वायु और जल समिति ने संयुक्त रूप वेस्ट मैनेजमेंट पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और हरित विकास की दिशा में नवीन दृष्टिकोण और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।
बुधवार को सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मनुष्य का जंगलों के निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा, परंतु उनके विनाश में हमारी भूमिका निर्विवाद है। यदि प्रकृति से नाता अब नहीं जोड$ा तो आने वाली पीढ़ियां केवल किताबों में ही हरियाली देख पाएंगी। उन्होंने कार्बन ट्रेडिंग को पर्यावरणीय संतुलन का माध्यम होने के साथ ही भारत की हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का सशक्त कदम भी है। बतौर मुख्य वक्ता यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर ओलाडेले ए ओगुनसेतन ने औद्योगिक अपशिष्ट के पुन: प्रयोग और पुनर्चक्रण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सतत् विकास कोई नीति नहीं, बल्कि जीवन का दृष्टिकोण है जो संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। इंटरनेशनल सोसाइटी आफ वेस्ट मैनेजमेंट, एयर एंड वाटर के अध्यक्ष डा. साधन कुमार घोष ने कहा कि वेस्ट लिटरेसी, अपशिष्ट में कमी और उसके उपयोग की समझ अभी भी एक बड$ी चुनौती है जिसे गंभीरता से लेने की आवयकता है। एचएनबी गढवाल विवि के पूर्व कुलपति एवं एटीआई के अध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा और प्राकृतिक संसधानों के संरक्षण के बिना सतत् विकास की कल्पना अधूरी है। सम्मेलन में सिन्टेफ (नार्वे) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. क्रिश्चियन जे एंगलसन, कुलपति डा. नरपिंदर सिंह, यूएनसीआरडी जापान के एनवायरमेंट प्रोग्राम कोअर्डिनेटर सीआरसी मोहंती, एनवायरमेंटल साइंस डिपार्टमेंट की हेड डा. प्रतिभा नैथानी, डा. सुमन नैथानी आदि ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन डा. भारती शर्मा ने किया।
तीन दिवसीय सम्मेलन में विविध तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा जिनमें देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विशेषज्ञ आनलाइन एवं आफलाइन माध्यम से अपने विचार और शोध प्रस्तुत करेंगे॥