छात्रों ने सीखी हथकरघा की बारीकियां

– एडिफाई वर्ल्ड स्कूल ने आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा भविष्य

देहरादून। देहरादून के एडिफाई वर्ल्ड स्कूल के करीब 60 विद्यार्थियों ने जाखन के जोहरी गांव स्थित गोदाम्बरी एंटरप्राइजेज (हैंडलूम) में दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कर हथकरघा और हस्तशिल्प की व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त की। बच्चों को न केवल किताबी ज्ञान, बल्कि पारंपरिक कला की जड़ों से जोड़ने का यह अनोखा प्रयास रहा।
इस दौरान विद्यार्थियों को बॉबिन भरने, धागों की विभिन्न किस्मों, लूम के संचालन और हाथ से कपड़ा बुनने की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई। हाथ से बने कपड़ों के स्वास्थ्य लाभ, पर्यावरण अनुकूलता तथा रंगाई की पारंपरिक विधि को विभिन्न रंगों के धागों और तैयार कपड़ों के माध्यम से विस्तार से समझाया गया। गोदाम्बरी एंटरप्राइजेज के संस्थापक सुशील नौटियाल ने बताया कि यह केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना को मजबूत बनाने का सक्रिय प्रयास है। उन्होंने कहा, “हथकरघा हमारा गौरव है। हम ‘स्वदेशी अपनाओ’ के सरकारी स्लोगन को व्यवहार में लाते हुए युवा पीढ़ी को इस उद्योग को रोजगार का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”
बच्चों ने उत्सुकता दिखाते हुए नौटियाल से कई सवाल पूछे, जिनके उन्होंने संतोषजनक उत्तर दिए। एडिफाई वर्ल्ड स्कूल के निदेशक एडवोकेट पंकज होलकर ने कहा, “हमारा मकसद बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखना है। ऐसे फील्ड विजिट से उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों, सामाजिक बदलावों और भविष्य की तैयारियों का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है।”
इस भ्रमण से बच्चों में हथकरघा की विरासत बचाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की भावना जागृत हुई। गोदाम्बरी हैंडलूम प्रबंधन ने सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए। यह दौरा शिक्षा और पारंपरिक कला के सुंदर मेल का बेहतरीन उदाहरण साबित हुआ।

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