जन्माष्टमी का व्रत एवं त्यौहार 16 अगस्त को मनाना ही शास्त्र सम्मत : आचार्य दैवज्ञ

  • 16 अगस्त की मध्यरात्रि सबसे अधिक शुभ

देहरादून विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी लोगों में जन्माष्टमी के व्रत को लेकर भ्रांतियां बन रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि 15 अगस्त को है कुछ 16 अगस्त को कह रहे हैं, इसका संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल का महत्वपूर्ण बयान जारी हो गया है। जारी बयान में आचार्य दैवज्ञ ने कहा है, कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से मनाया जाता है।

ज्योतिष मर्मज्ञ आचार्य दैवज्ञ के अनुसार इस वर्ष यह तिथि 15 अगस्त 2025 की रात करीब 11:48 बजे से लगेगीऔर इसका समापन 16 अगस्त 2025 की रात 9:34 बजे होगा। श्री कृष्ण भगवान का जन्म अष्टमी तिथि की रात्रि रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इस वर्ष यह स्थिति 15 अगस्त की रात्रि को नहीं बन रही है, और 16 अगस्त की रात्रि 9:34 पर यद्यपि अष्टमी तिथि समाप्त हो रही है ,परंतु मध्य रात्रि को रोहिणी नक्षत्र है इसलिए 16 अगस्त को ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।

ज्योतिष शास्त्र में अंतरराष्ट्रीय हस्ताक्षर डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” विश्लेषण करते हुए बताते हैं, कि 16 अगस्त 2025 की मध्यरात्रि सबसे अधिक शुभ है, क्योंकि इस दौरान अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत सिद्धि योग और निशीथ काल जैसे सभी शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसा लंबे समय बाद हो रहा है जब गृहस्थियों और वैष्णवों दोनों के लिए 16 अगस्त को व्रत लेना शुभ फलदाई है।

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