ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज जीएसटी सुधारों के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया है। इस सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि जीएसटी भारत की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और एकीकृत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने किसानों, उत्पादकों और कारीगरों को थोक व्यापारियों व खरीदारों से सीधे जुड़ने का मंच दिया है। डॉ सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आर्थिक नीतियों को समझकर नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान दें। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के जीएसटी के आने से करों के दोहराव में कमी आई है और व्यापार को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जीएसटी देश में आर्थिक विकास और मजबूत राष्ट्रीय बाजार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 12 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में ग्रीन टैक्सेशन, छोटे व्यवसायों पर जीएसटी का प्रभाव, अप्रत्यक्ष कर सुधार, एमएसएमई अनुपालन, जीएसटी से विकसित राजस्व मॉडल और डिजिटलाइजेशन से उपभोक्ता व्यवहार में आ रहे बदलाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में चार देशों और दस राज्यों से आए वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ अपने शोध पत्र और समाधान प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल आफ मैनेजमेंट और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के हेड डॉ अजय कुमार पांडे, इन्फिनिट के संस्थापक डॉ रितेश जैन, केरला यूनिवर्सिटी के डॉ राजेंद्र बैकाडी, डॉ विनय कांडपाल, डॉ एम पी सिंह अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रभु माथुर और कीर्ति उदय ने किया।
