जो जोंग पर तिरंगा लहराकर दृष्टि दिव्यांग श्वेता ने रचा इतिहास

  • लद्दाख की 632 मीटर ऊंची चोटी फतह करने वाली पहली दृष्टि दिव्यांग महिला बनी
  • हौंसलेऔर मेहनत से लिखी सफलता की नई इबारत
  • सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में किया गया सम्मानित


देहरादून। दृष्टि दिव्यांग पर्वतारोही श्वेता ने लद्दाख की सबसे ऊं ची और दुर्गम चोटी जो जोंगे पर तिरंगा फहरा कर इतिहास रच दिया। श्वेता ने अपने गाइड और पर्वतारोही अंकित भारती के साथ मिलकर जो जोंगे चोटी फतह की। इसके साथ ही श्वेता उक्त चोटी फतह करने वाली विश्व की पहली दृष्टि दिव्यांग महिला बन गई।


मंगलवार को दृष्टि दिव्यांग श्वेता अपने गाइड और पर्वतारोही अंकित भारती के साथ हरिद्वार बाईपास स्थित सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल पहुंची। स्कूल में श्वेता का जोरदार स्वागत करने के साथ ही सम्मानित भी किया गया। बलूनी ग्रुप के एमडी विपिन बलूनी ने कहा कि श्वेता की उपलब्धि अन्य लोगों विशेषकर युवा वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत हैं। श्वेता ने दुर्गम चोटी को फतह कर संदेश भी दिया है कि भले ही जीवन में कितनी भी कठिनाई आएं, लेकिन उनका सामना डटकर करना चाहिए। हौंसला, मेहनत और कुछ कर गुजरने का लक्ष्य हो तो सफलता मिल ही जाती है। श्वेता ने अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जो जोंग को फतह करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मुकाम हासिल किया। उन्होंने कहा कि उक्त चोटी ग्लेश्यिर के ऊपर बसी है। कदम—कदम पर खतरा है। आक्सीजन की कमी के साथ ही चोटी में फिसलने और गहरी घाटी में गिरने का खतरा बना रहता है। उन्होंने अपना अभियान तीन चरणों में किया। 17 जुलाई को सुबह चार बजे उन्होंने पर्वतारोही अंकित भारती के साथ चढ$ना शुरू किया। एक वक्त ऐसा लगा कि उनकी सांस थम जाएंगी। चोटी से महज 100 मीटर की दूरी पर वह पूरी तरह से हिम्मत हार चुकी थी। तब अंकित भारती ने उसे चुनौती दी और हिम्मत जुटा कर चोटी तक पहुंच गयी। कुछ मिनटों तक उसे होश ही नहीं था, लेकिन जब एहसास हुआ कि चोटी फतह कर ली तो खुशी का ठिकाना न रहा। दोनों पर्वतारोहियों ने चोटी पर तिरंगा और सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल का ध्वज लहराया।
पर्वतारोही अंकित भारती ने बताया कि श्वेता ने तैयारी के लिए जार्ज एवरेस्ट और दयारा बुग्याल की ट्रेनिंग की। इसके बाद ही जो जोंग पर चढाई करने का फैसला किया। निर्णय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन श्वेता ने हिम्मत और हौंसले से जंग जीत ली। विदित हो कि बलूनी ग्रुप के एमडी विपिन बलूनी ने 14 जुलाई को एसबीपीएस से लद्दाख की चोटी जो जोंग सम्मिट के लिए दोनों पर्वतारोहियों को रवाना किया था।

दिव्यांगजनों को भी सम्मान की नजर से देखें
देहरादून। दृष्टि दिव्यांग श्वेता छठी कक्षा तक पूरी तरह से स्वस्थ थी, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसने दृष्टि खो दी। पिछले तीन साल से वह पूरी तरह से दृष्टि दिव्यांग है। दिव्यांग होने के बावजूद श्वेता ने जीवन में हार नहीं मानी और कुछ कर गुजरने का फैसला किया। श्वेता ने कहा कि वह साबित करना चाहती थी कि दिव्यांगजन को भी समाज सम्मान की नजरों से देखें। इस उद्देश्य के लिए उन्हें पर्वतारोहण अपनाना ही सबसे बेहतर लगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को अवसर और सहयोग मिलने पर वह भी सम्मानपूर्वक जीवन गुजार सकते हैं। श्वेता ने कहा कि अब उसका लक्ष्य महाद्वीपीय चोटियों को फतह करना है।

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