देहरादून। जैन महामुनि आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि वर्षा योग समाज को हरियाली से भरने का पर्व है। समाज को वैदिक आचरण, सदाचार, अहिंसा, खानपान की युति, स्वास्थ्य लाभ चातुर्मास में अपनाएं गए संकल्प से होता है। समाज की भलाई के लिए धर्म की ओर उन्मुख होने के लिए चातुर्मास एक प्रभावी माध्यम है।
3१वें पुष्प वर्षायोग के लिए दून पहुंचने पर सोमवार को जैन भवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए जैन महामुनि राज आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि अगले चार माह सारे देवगण सो जाते है लेकिन संत जागृत रहते है। उन्होंने कहा कि नौ जुलाई का मंगल कलश स्थापना होगी। इसके साथ ही छह वर्ष बाद उन्हें दून में पुष्प योग का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म युवाओं को वह सामर्थ्य प्रदान करे कि वह समाजपयोगी भूमिका में आएं। इसके लिए जरुरी है कि हम नई पीढ़ी को उचित वातावरण देते हुए नैतिकता, मानवता और धर्म के मार्ग से जोड़ें। धर्म के विकृत स्वरूप पर उन्होंने कहा कि यह पहचानना जरुरी है कि सच्चा संत कौन है, सच्चे संत का सानिध्य बेहद जरुरी है। इस मौके पर मीडिया समन्वयक मधु जैन समेत अनेक लोग मौजूद थे।
