- राज्य स्थापना दिवस समारोह के तीसरे दिन जौनसारी हारूल नृत्य ने बांधा समां
देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह निनाद के तीसरे दिन हिमालयी राज्यों की लोकसंस्कृति की रंगबिरंगी छटा देखने को मिली। तिब्बत से लेकर सुदूर पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश तक के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग कर दिया।
सोमवार को गढ़ी कैंट स्थित हिमालय संस्कृति केंद्र कार्यक्रम का शुभारंभ मेयर सौरभ थपलियाल और उत्तराखंड साहित्य एवं कला परिषद की अध्यक्ष मधु भट्ट ने किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के प्रसिद्ध हारूल नृत्य ने समारोह में लोक संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। लोककलाकार लायकराम और साथियों ने जब परात घुमाते हुए पारंपरिक धुनों पर नृत्य किया, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। हारूल के गीत वीर गाथाओं, प्रेमकथाओ और एतिहासिक प्रसंगों से प्रेरित होते हैं। यह नृत्य सामान्यत: मरोज और बिस्सू जैसे पारंपरिक उत्सवों में किया जाता है। प्रस्तुति के बाद कलाकारों को उपनिदेशक आशीष कुमार ने सम्मानित किया। हिमालयी संस्कृति की विविधता को दर्शाते हुए तिब्बत इंस्टीटूट ऑफ परफॄमग आट्र्स धर्मशाला के कलाकारों ने स्नो लॉयन और नागरी माब्जा लोकनृत्य प्रस्तुत किए। वहीं अरुणाचल प्रदेश की आदी और गालो जनजातियों के कलाकारों ने अपने पारंपरिक गीत और नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनकी पारंपरिक पोशाकें और आभूषण आकर्षण का केंद्र रहे। मेयर सौरभ थपलियाल ने अतिथि कलाकारों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर संस्कृति निदेशालय के उपनिदेशक आशीष कुमार सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, छात्र और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।