पुस्तक मेले में बच्चों ने दिखाई अपनी कल्पना और रचनात्मकता… बच्चों को प्रकृति पर्व से जोड़ने पर जोर

– फूलदेई पर बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

देहरादून। देहरादून के परेड ग्राउंड में चल रहे पुस्तक मेले में आज साहित्यकार मुकेश नौटियाल के निर्देशन में बच्चों के लिए फूलदेई विषय पर विशेष चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में देहरादून के विभिन्न विद्यालयों के लगभग दो सौ बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने हिमालय की वसंत ऋतु, फूलदेई पर्व और प्रकृति की सुंदरता को अपनी कल्पना से कागज पर उतारा। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों में पहाड़ों की हरी-भरी वादियाँ, खिलते फूल, नदियाँ और वसंत के रंग बिखरे नजर आए। साहित्यकार मुकेश नौटियाल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि फूलदेई हिमालय में वसंत के आगमन का महत्वपूर्ण लोकपर्व है। शिवालिक और हिमालय के पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हमें बच्चों को इन प्रकृति-पर्वों से जोड़ना चाहिए। इससे उनमें प्रकृति के प्रति संवेदना जगेगी और वे अपने पर्यावरण को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी लिखी चर्चित रचना “वसंत मेरे गांव का” पिछले कई वर्षों से केरल राज्य के शिक्षा विभाग की कक्षा दसवीं की हिन्दी पाठ्यपुस्तक में शामिल है और विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही है। चित्रकला प्रतियोगिता दून बुक फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित की गई थी जिसमें बच्चों को सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देने का प्रयास किया गया। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें दर्शकों ने काफी रुचि दिखाई।

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