देहरादून। भारतीय ज्ञान परंपरा पूरे विश्व में श्रेष्ठ है परंतु उसकी संपूर्णता के मूल में संस्कृत के वेद और शास्त्र ही है, इनके बिना अधूरापन रह जाएगा।

 

उपरोक्त विचार कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं संस्कृत शिक्षा के सचिव दीपक कुमार ने व्यक्त किए वह दून विश्वविद्यालय के डॉक्टर नित्यानंद ऑडिटोरियम में यूकोस्ट एवं संस्कृत विभाग के सौजन्य से आयोजित तीन दिवसीय भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत और विज्ञान व्याख्यान माला के अवसर पर बोल रहे थे।

 

*सचिव ने कहा कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस युग में भी यदि हम संस्कृत के वेदों और शास्त्रों को भूल गए तो फिर हमारी वह यात्रा अधूरी रह जाएगी जिसके लिए भारत वर्तमान में तेजी से आगे बढ़ रहा है ,उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों को आयोजित किया जाएगा।*

 

यू कास्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने कहा कि विज्ञान का उद्भव संस्कृत के ज्ञान से ही हो रखा है, इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल में वास्तव में संस्कृत ही है।

 

*कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने सचिव का स्वागत करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में संस्कृत शिक्षा विज्ञान को साथ लेकर जो चल रही है उसके उत्तराखंड में सकारात्मक परिणाम होंगे और बताया कि बहुत शीघ्र विश्वविद्यालय में हिंदू दर्शन पर कक्षाएं प्रारंभ होने वाली है।*

 

संस्कृत शिक्षा के निदेशक डॉ आनंद भारद्वाज ने विज्ञान के उदाहरण देकर कहा कि भारतीय ज्ञान और विज्ञान का संबंध प्राचीन काल से ही रहा है।

 

*सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने कहां कि भारत का 99% जनमानस संस्कृत और विशेष रूप से वेदों के नेत्र ज्योतिष पर विश्वास करता है, और ज्योतिष पूर्ण रूप से विज्ञान है, कहा कि जो संबंध पृथ्वी और सूर्य के बीच है, वही संबंध कर्म और भाग्य के बीच है, घूमती पृथ्वी है परंतु सूर्य को उदय होने का श्रेय है, इसी प्रकार कर्म हम करते हैं परंतु भाग्य को उदय होने का श्रेय है।*

 

अकादमी के सचिव बाज आर्यन ने सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत करते हुए कार्यक्रम में पहुंचने पर धन्यवाद अदा किया कार्यक्रम का संचालन शोध अधिकारी हरीश चंद्र ने किया।

 

कार्यक्रम में विशेष रूप से यूकोस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत, तथा विषय विशेषज्ञ के रूप में देवप्रयाग केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक, कमल डिमरी, डा वैशाली गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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दून विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर बोलते हुए सहायक निदेशक डॉ घिल्डियाल।

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