आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों एवं सेवानिवृत्ति सैन्य अधिकारियों से किया संवाद
देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज देहरादून में पूर्व सैनिकों एवं सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद में उन्होंने राष्ट्र निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।
सोमवार को निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने डॉ. भागवत का शाल ओढ़ाकर एवं पारंपरिक टोपी से स्वागत किया।कार्यक्रम में डॉ. भागवत ने कहा कि राष्ट्र के भाग्य निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है। समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर क्रांतिकारी आंदोलनों की परंपरा का स्मरण कराते हुए कहा कि स्वाधीनता की ज्योति कभी बुझी नहीं। संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को जन्मजात राष्ट्रभक्त बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, न कि चुनावी राजनीति। संघ बिना बाह्य साधनों के खड़ा हुआ और दो प्रतिबंधों के बाद भी समाज की आत्मशक्ति से आगे बढ़ा। जिज्ञासा संवाद सत्र में पूर्व सैनिकों के प्रश्नों पर डॉ. भागवत ने संतुलित उत्तर दिए। अग्निवीर योजना को प्रयोग बताते हुए कहा कि अनुभव से सुधार की गुंजाइश है। कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए पड़ोसी देशों के प्रति सतर्क नीति पर बल दिया। हिंदू विचार को उदार एवं समावेशी बताते हुए कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना इसका मूल है; मंदिर, जल स्रोत, श्मशान सभी के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए।
सोशल मीडिया की कटुता पर उन्होंने शास्त्रार्थ और संवाद की परंपरा पुनर्जीवित करने की बात कही। भ्रष्टाचार को “नियत” की समस्या बताते हुए बच्चों में संस्कार, बचत और परोपकार की भावना विकसित करने पर जोर दिया। समान नागरिक संहिता (UCC) को राष्ट्रीय एकात्मता का साधन बताया तथा जनसंख्या असंतुलन, मतांतरण और घुसपैठ पर समग्र नीति की आवश्यकता बताई। पूर्व सैनिकों से आह्वान करते हुए कहा कि सीमाओं के साथ समाज में भी सेवा आवश्यक है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से संघ के 1.30 लाख से अधिक सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का निवेदन किया।
कार्यक्रम में इसमें छह जनरल, वाईस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर, 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी तथा सैकड़ों पूर्व सैनिक (कप्तान, हवलदार आदि) अपनी सैन्य वर्दी में उत्साहपूर्वक शामिल हुए। मंच संचालन राजेश सेठी ने किया।
