राष्ट्रीयकरण से आम व्यक्ति तक पहुंची बैंकिंग सुविधाएं

  • बैंकों के राष्ट्रीयकरण की 56वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम आयोजित


देहरादून। उत्तरांचल बैंक इम्प्लाईज यूनियन द्वारा बैंकों के राष्ट्रीयकरण की 56वीं वर्षगांठ पर एक सभा का आयोजन किया गया। सभा में बैंक कर्मियों ने एकजुटता के साथ बैंकों के राष्ट्रीयकरण के स्वरूप को बनाये रखने का संकल्प लिया।


शनिवार को यूनियन के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 19 जुलाई क1969 को 14 बडे बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले भारत में केवल 820 बैंक शाखायें की जो आज बढकर 900 से ऊ पर हो गई है। कुल बैंक कर्मचारियों की संख्या भी एक लाख से बढकर आठ लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयकरण से पहले प्राथमिक क्षेत्र को दिया गया ऋण शून्य था जो 40 प्रतिशत हो चुका है। राष्ट्रीयकरण के बाद गांव के दूरस्थ स्थानों में भी बैंकों की शाखायें खुलीं जिससे आम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुंची। किसानों के जीवन स्तर में भी सुधार हुआ। इस मौके पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सुदृढ और विस्तारित करने, बैंकों का निजीकरण बंद करने,  निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने, कारापोरेट खराब ऋणों की वसूली करने, जानबूझकर चूककर्ताआें पर आपराधिक कार्रवाई करने एवं बैंकों में पर्याप्त भर्ती करने की मांग की गई।
इस मौके पर अनिल जैन, विनय शर्मा, राजन पुण्डीर, चन्द्रकांत जोशी, बीपी सुन्दरियाल, विनोद उनियाल, विजय गुप्ता, आकाश उनियाल, सन्नी कुमार, गोपाल तोमर, महेश गुप्ता, सौरभ शर्मा, आरके गैरोला, बीके आेझा, संजय तोमर, कुलदीप सिंह, राजबीर सिंह आदि मौजूद थे।

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