लॉ कालेज के छात्रों ने सीखे मनोवैज्ञानिक शव परीणक्षण के गुर

  • उत्तरांचल विवि में फारेंसिक व मनोवैज्ञानिक शव परीक्षण पर कार्यशाला का आयोजन

देहरादून। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में फॉरेंसिक जांच विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में लॉ कालेज के छात्र-छात्राओं ने मनोवैज्ञानिक शव परीक्षण के गुर सीखे। कार्यशाला में लॉ एवं फॉरेंसिक विज्ञान के 300 छात्रों ने भागीदारी की।
सोमवार को आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि देश की प्रथम महिला फॉरेंसिक वैज्ञानिक एवं महाराष्ट्र सरकार की फॉरेंसिक  लेब की पूर्व निदेशक डा. रूकमणी कृष्णामूर्ति ने आत्महत्या व अन्य अस्पष्ट मौतों के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारकों को समझने एवं उनका कानूनी मामलों में साक्ष्य के रूप में उपयोग करने सम्बन्धी तकनीकियों को समझाया। बतौर विषय विशेषज्ञ डा. अंजुम परवेज ने फॉरेंसिक साक्ष्यों के कानूनी पक्ष को समझाया। उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने कहा कि मनोविज्ञान शव—परीक्षण एवं पीड़ित विज्ञान साक्ष्य उपकरण के रूप में मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करने का एक अचूक उपकरण हैं। भारत के नये अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक विश्लेषण को विशेष तरजीह दी गई है। विवि कुलपति प्रो. धर्मबुद्धि ने कहा कि फॉरेंसिक एक बहुविषयक ज्ञान की शाखा है जिसका महत्व लॉ में तेजी से उभरकर आया है। उन्होंने छात्रों को थ्योरी के साथ—साथ फोरेंसिक के प्रेक्टिकल पक्ष पर भी दक्षता हासिल करने की सलाह दी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रो. अजय सिंह, डा. डी कृष्णामूर्ति, प्रो. राधेयाम झा, डा. ऐश्वर्य सिंह, अशोक डोभाल, ईशा सिंह, देवेश तिवारी, हिमांशु सौरभ, मुस्कान गुप्ता समेत अनेक लोग मौजूद

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