सामान्य धर्म सभी के लिए पालनीय है। ये सभी स्मृतियों में उल्लिखित हैं जो कुल मिलाकर 37 धर्म होते हैं। इनका पालन सभी को करना चाहिए।

 

उक्त उद्गार परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती 1008 ने मार्दव धर्म एवं रक्षा धर्म नाम के पुस्तक के अवसर पर श्रीविद्यामठ में आयोजित सायंकालीन सभा में कही।

 

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य इन सभी धर्मों को अपने जीवन में उतारेगा तो अवश्य ही यह लाभकारी होगा।

 

इस अवसर पर डा रंजन शर्मा जी ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

 

कार्यक्रम का संचालन साध्वी पूर्णाम्बा दीदी जी किया।

 

 

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सर्वश्री:-मुकुंदानंद ब्रम्ह्चारी, परमात्मानंद ब्रम्हचारी,संजय पाण्डेय मीडिया प्रभारी,डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल,कमला कांत त्रिपाठी,गिरीश दत्त पाण्डेय,डॉ साकेत शुक्ला,विनोद शुक्ला,रवि त्रिवेदी,कीर्ति हजारी शुक्ला,सौरभ हजारी शुक्ला,विकल्प शुक्ला,आदि जन उपस्थित रहे।

 

प्रेषक

संजय पाण्डेय-मीडिया प्रभारी।

परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य जी महाराज।

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