*शेरे उत्तराखंड*
देहरादून ।कहते हैं, कि “पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं” यह कहावत सहायक निदेशक डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल पर सटीक बैठती है, जिन्होंने पूरी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से हराकर पुरानी पेंशन योजना में शामिल हुए हैं।
विदित है, कि केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त हुए कार्मिकों को पुरानी पेंशन योजना से हटाकर नई पेंशन योजना में शामिल कर दिया था, डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल की नियुक्ति 2003 में जारी विज्ञप्ति के आधार पर राज्य लोक सेवा आयोग से वर्ष 2006 में हुई, जिस कारण उन्हें पुरानी पेंशन योजना से वंचित होना पड़ा।
*परंतु बहुत सामान्य परिवार से एक प्राथमिक शिक्षक के बेटे डॉक्टर घिल्डियाल ने जून 2008 में अकेले ही उत्तराखंड हाई कोर्ट नैनीताल में सरकार के विरुद्ध याचिका दायर की जहां सरकार मुकदमा हार गई तो सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई, सरकारी दांव-पेचों में माहिर डाक्टर घिल्डियाल भी कहां हार मानने वाले थे, उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़ी और पूरे सरकारी अमले को झुकने पर मजबूर कर दिया,इधर मोदी सरकार ने समय की नजाकत को देखते हुए 1 अक्टूबर 2005 से पूर्व विज्ञप्ति पर नियुक्त कार्मिकों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने का ऐलान किया तो उत्तराखंड सरकार ने भी इतनी लंबी लड़ाई को धैर्य पूर्वक लड़ने वाले डॉक्टर चन्डी प्रसाद घिल्डियाल का लोहा मानते हुए उनको सबसे पहले लाभकारी पुरानी पेंशन योजना में शामिल कर दिया।*
पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने से प्रसन्न होकर न्यायपालिका एवं सरकार का धन्यवाद करते हुए डॉक्टर घिल्डियाल ने कहां कि यद्यपि कानूनी लड़ाई चल रही थी, परंतु इस बीच सरकारों ने बिना किसी भेदभाव केउन्हें” *प्रथम गवर्नर अवार्ड*” सहित अनेको सम्मानों से सम्मानित किया परंतु उनकी लड़ाई भी जारी रही और उसका परिणाम सकारात्मक निकला, इसको वह विशेष रूप से अपने स्वर्गीय माता-पिता का आशीर्वाद मानते हैं।
