सुरक्षा की दृष्टि से डेमोग्राफी बदलाव पर सजग रहने की जरूरत

दून विवि में गंगा शोध केन्द्र व देवभूमि विचार मंच ने आयोजित की कार्यशाला

देहरादून। गंगा शोध केन्द्र द्वारा आर्यावर्त संस्था एवं देवभूमि विचार मंच (प्रज्ञा प्रवाह) के सहयोग से दून विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने ‘जनसांख्यिकी असंतुलन: वर्तमान और भविष्य हिमालयी राज्यों के विशेष सन्दर्भ में‘’ विषय पर प्रकाश डाला।


शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता सेंटर फार पालिसी स्टडी के निदेशक पद्मश्री डा. जतिंदर कुमार बजाज ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी बदलाव सामरिक एवं सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चुनौती सिद्ध हो सकती है। उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में आज हिंदू आबादी पूर्णत: अल्पसंख्यक हो चुकी है। बिहार, बंगाल और बांग्लादेश सीमा का त्रिकोण चिकननेक में डेमोग्रफी तेजी से परिवर्तित हो रही है। इस पर नियंत्रण के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे, क्योंकि ऐसे बदलावों से कोस्टल एरिया भी अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय धर्मों (हिन्दू, सिक्ख, जैन, बौद्ध) की प्रजनन दर मुस्लिम जनसंख्या की प्रजनन दर के अनुपात में लगातार बहुत घट रही है। मुस्लिम जनसंख्या का अधिकांश घनत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी बिहार, झारखंड का कुछ भाग, पश्चिम बंगाल का उत्तर-पूर्वी भाग, असम का पश्चिमी एवं दक्षिण—पूर्वी भाग में है। उन्होने डेमोग्रफी बदलाव के एक सदी के आंकड़े भी पेश किए। बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन एक बड$ी गंभीर समस्या है। जनसंख्या असंतुलन के आंकड़े का वैज्ञानिक रूप से निरीक्षण एवं अध्ययन किया जाना आवश्यक है। बतौर विशिष्ट वक्ता सुरेश सुयाल, प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र संयोजक (उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड) भगवती प्रसाद राघव, प्रज्ञा प्रवाह) एवं उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डा. देवेन्द्र भसीन, कार्यक्रम संयोजक प्रो. रीना चन्द्रा, देवभूमि विचार मंच की प्रांत संयोजक डा. अंजलि वर्मा, गंगा शोध केंद्र के निदेशक डा. विकास सारस्वत, डा. पृथ्वीधर काला आदि ने विचार व्यक्त किये।
इस मौके पर गंगा शोध केन्द्र के उप निदेशक डा. रवि दीक्षित, डा. एचसी पुरोहित, विशाल वर्मा, प्रो. आरपी ममगाई, डा. राजेा भटट, एकता त्रिपाठी, डा. सुनेना रावत, प्रो. विजय श्रीवास्तव, प्रो सुनित कुडियाल, प्रो. एचडी भटट, डा. देव जैसाली, डा. बसुंधरा उपाध्याय समेत अनेक लोग मौजूद थे।

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