“हर जीवन का मूल्य है” थीम पर साझा किए अनुभव, समावेशिता का दिया सशक्त संदेश

– डीएवी महाविद्यालय में विश्व ऑटिज्म दिवस पर जागरूकता आयोजित 

देहरादून। डीएवी महाविद्यालय में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर “ऑटिज्म और मानवता: हर जीवन का मूल्य है” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) की प्रारंभिक पहचान, समावेशी शिक्षा तथा समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम का मुख्य व्याख्यान अमेरिका स्थित शाइन एवीआई लर्निंग की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल ने दिया। उन्होंने ऑटिज्म की प्रारंभिक पहचान, संवेदी चुनौतियों और परिवार व समुदाय स्तर पर सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी शिक्षा और जीवन-कौशल विकास की रणनीतियों पर भी जोर दिया। कर्नल डॉ. सुदीप आजाद ने ऑटिज्म की क्लिनिकल प्रोफाइलिंग, प्रारंभिक लक्षणों (Early Red Flags) तथा साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों पर वैज्ञानिक प्रस्तुति दी। लतिका रॉय फाउंडेशन की सीनियर एजुकेटर सुश्री शिवानी कपूर ने “जागरूकता से कार्यान्वयन तक” विषय पर बोलते हुए सामाजिक दृष्टिकोण बदलने, नीति-आधारित हस्तक्षेप और समुदाय-आधारित पुनर्वास (CBR) की जरूरत पर बल दिया।
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रही ऑटिज्म प्रभावित युवती यशस्वी जोशी की भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति, जिसने समावेशिता का सृजनात्मक संदेश दिया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कौशल कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को समावेशी परिसर बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. ओनिमा शर्मा ने संस्थागत स्तर पर विविधता, समानता और समावेश (DEI) को मजबूत करने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिशा सक्सेना ने किया, जबकि उप-प्राचार्य प्रो. एस.पी. जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डी.बी.एस. (पी.जी.) कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल पाल सहित अनेक शिक्षाविद् उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 250 से अधिक शिक्षक, छात्र, शोधार्थी और स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रो. प्रशान्त सिंह (समन्वयक) और प्रो. एच.एस. रंधावा (सह-समन्वयक, मीडिया सेल) की सक्रिय भूमिका रही।
इस मौके पर प्रो. अनुपमा सक्सेना, प्रो. रीना चंद्रा, प्रो. गीतांजलि तिवारी, प्रो. सुमन त्रिपाठी, प्रो. देवना शर्मा, प्रो. रचना दीक्षित, डॉ. विनीत विश्नोई, डॉ. एस. वी. त्यागी, डॉ. गोपाल छेत्री, डॉ. नैना श्रीवास्तव, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. पुनीत सक्सेना, डॉ. राखी उपाध्याय, डॉ. निशा वालिया, डॉ. रूपाली बहल और डॉ. उषा पाठक आदि ने सक्रिय योगदान दिया।

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