भूविज्ञान के विद्यार्थियों ने जाना अंतरिक्ष और धरती का रहस्य

 

 

 

देहरादून

बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के भूविज्ञान विभाग के स्नातक छठे सेमेस्टर के छात्रों ने एक विशेष शैक्षणिक दौरे के अंतर्गत वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के साथ-साथ भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान एवं देहरादून स्थित प्रसिद्ध भू-आकृतिक स्थल सहस्त्रधारा का भ्रमण किया।

 

दौरे के प्रथम चरण में छात्रों ने भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान का अवलोकन किया, जो अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार के अधीन एक अग्रणी शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान है। वर्ष 1966 में स्थापित इस संस्थान में मौजूद सेटेलाइट आधारित संग्रहालय छात्रों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहाँ पर छात्रों ने सेटेलाइट, स्पेस सूट और अन्य अंतरिक्ष संबंधी तकनीकी उपकरणों को देखा और समझा। इस अवसर पर डॉ. हरिशंकर श्रीवास्तव, ग्रुप डायरेक्टर, पीपीईजी और जावेद (वरिष्ठ सहायक) ने छात्रों को भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान की कार्यप्रणाली, अंतरिक्ष विज्ञान में उसकी भूमिका, तथा पृथ्वी अवलोकन से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्होंने सैटेलाइट डाटा, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीकों के उपयोग को व्यावहारिक दृष्टि से समझाया। विभाग के शिक्षक डॉ. सौरभ बर्मन ने इस ज्ञानवर्धक सत्र के लिए ग्रुप डायरेक्टर का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इसके पश्चात छात्रों ने देहरादून से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थल सहस्त्रधारा का भ्रमण किया। डॉ. सौरभ बर्मन ने बताया कि यह स्थल भूविज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ पाए जाने वाले सल्फर युक्त जलप्रपात त्वचा रोगों की प्राकृतिक चिकित्सा के लिए प्रसिद्ध हैं। चूने के स्टैलेक्टाइट्स, गंधक की प्रचुरता, और लगातार टपकते जल की गुफाएँ इसे एक अनोखी भू-आकृति बनाती हैं। स्थानीय किंवदंती के अनुसार, गुरु द्रोणाचार्य ने यहाँ तपस्या की थी और उनकी तीरों की वर्षा से यह जलधारा उत्पन्न हुई थी। सहस्त्रधारा की गुफाएँ, गंधक युक्त जल और प्राकृतिक रूप से तराशी गई शिलाएँ विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला की तरह रहीं।

 

दौरे के अंत में डॉ. वर्तिका शुक्ला ने छात्रों द्वारा पूछे गए भूविज्ञान संबंधित प्रश्नों का उत्तर दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे अपने शोध एवं अध्ययन में इस अनुभव को सार्थक रूप से सम्मिलित करें।

छात्रों ने इस अध्ययन यात्रा के सफल आयोजन के लिए विभागाध्यक्ष प्रो. नरेंद्र कुमार, डॉ. सौरभ बर्मन, डॉ. वर्तिका शुक्ला तथा समस्त शिक्षकों का आभार प्रकट किया।

 

यह शैक्षणिक भ्रमण न केवल छात्रों के ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि उन्हें धरती और आकाश के अद्भुत रहस्यों को जानने और समझने का अवसर भी मिला।

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