- पिछले एक साल में उत्तराखंड साइबर ठगी के करीब 2600 शिकायतें हुई दर्ज
- साइबर क्राइम से बचाव के लिए जागरूता जरूरी को बताया हथियार
- साइबर क्राइम के डिप्टी एसपी ने साइबर ठगी से बचाव के दिए टिप्स
देहरादून। साइबर ठगों ने उत्तराखंड से एक साल में करीब 167 करोड़ रुपये उड़े लिए। यह वह आंकड़ा जिसकी शिकायत पुलिस साइबर क्राइम में दर्ज हो चुकी है। सबसे ज्यादा ठगी के शिकार सीनियर सिटीजन हो रहे है। उत्तराखंड में पिछले एक साल में साइब्र काइम से जुड़ी करीब 2600 शिकायतें दर्ज हुई।
मंगलवार को प्रेस क्लब में बजाज फाइनेंस द्वारा डिजिटल फ्राड को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देहरादून में साइबर क्राइम विभाग के पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्रा ने उत्तराखंड में साइबर क्राइम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, बैंक, कम्प्यूटर, फेक आईटी, ओटीपी, फर्जी एसएमएस, डिजिटल एरेस्ट, व्हटसप पर फर्जी लिंक आदि के जरिये आये दिन लोग ठगी के शिकार हो रहे है। ऐसे में जागरूकता ही साइबर क्राइम से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को स्वयं जागरूक होने के साथ ही लोगो को भी जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी होने पर समय गंवाये बिना 1930, 112 अथवा 100 नम्बर डायल करना चाहिए। साथ ही उन्होंने पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) को रोकने के लिए आधार बायोमेट्रिक्स को सुरक्षित रखने के पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक बार ठगी हो जाने पर रकम की वापसी आसान नहीं होती है। कारण साइबर ठग सिम लेने व बैंक खाता खोलने के लिए फेक आईडी का इस्तेमाल करते है। पिछले एक साल में 167 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई, जबकि रिकवरी का 25 से 30,प्रतिशत से हुई। पूर्व डीएसपी बृजभूषण जुयाल ने नागरिकों को सोशल और डिजिटल प्लेटफर्म पर सुरक्षित रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ठग अक्सर कम जागरूकता का फायदा उठाते हैं और लोगों को बेतहाशा लाभ के झूठे वादे करके लुभाते हैं।
बजाज फाइनेंस के प्रवक्ता ने कह कि साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ नाकआउट डिजिटल फ्राड नाम से एक जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उपभोक्ताओं की वित्तीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने ओटीपी पिन साझा करने, संदिग्ध ईमेल, एसएमएस, लिंक, क्यूआर कोड पर क्लिक न और अज्ञात स्रोतों से एप्लिकेान डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी।