आपदा पीडि़त परिवारों के बच्चों का कुछ कोर्साें में निशुल्क शिक्षा

  • एसजीआरआर विवि धराली आपदा पीडि़तों को पहुंचाएगा राहत
  • महंत इन्दिरेश अस्पताल में धराली के आपदा पीडि़तों का निशुल्क उपचार


देहरादून। एसजीआरआर विश्वविद्यालय व श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने धराली (उत्तरकाशी) में आई प्रातिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत कार्यों की कमान संभाल ली है। विवि प्रशासन उत्तरकाशी जनपद के बड$कोट स्थित एसजीआरआर पब्लिक स्कूल के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाएगा। वहीं विवि के भूविज्ञान के शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य के माध्यम से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान बादल फटने की संभावनाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।


विवि के कुलसचिव डा. लोकेश गंभीर ने बताया कि समन्वय स्थापित राहत कार्यों को अंजाम दिया जाएगा। इसके तहत आपदा प्रभावितों को दवाइयां, खाद्य सामग्री, कंबल, कपड$े और अन्य आवयक वस्तुएं उपलब्इ कराई जाएगी। विवि प्रशासन ने आपदा से प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को कुछ चयनित पाठ्यक्रमों में निशुल्क प्रवेश देने का भी एलान किया है। साथ ही देहरादून स्थित श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में पीड़ितों को निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। एसजीआरआर पब्लिक स्कूल बडकोट की प्रधानाचार्य कमला रावत एवं एसजीआरआर पब्लिक स्कूल पुरोला के प्रधानाचार्य उत्तम सिंह चौहान ने विवि चेयरमैन महंत देवेंद्र दास महाराज के विशेष दिशा—निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए टीम के साथ सक्रिय हो गए है। प्रधानाचार्य ने एडीएम उत्तरकाशी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर राहत सामग्री भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। उन्होंने बताया कि भारी वर्षा के कारण उत्तरकाशी से आगे का मार्ग बाधित है जिस कारण राहत सामग्री को उत्तरकाशी स्थित राहत सामग्री नियंत्रण कक्ष में भेजा जाएगा। इसके अलावा उत्तरकाशी स्थित सभी एसजीआरआर संस्थानों को राहत एवं बचाव कार्यों में हर संभव सहयोग करने का निर्देश दिया गया। वहीं विवि के भूशोधार्थियों का मानना है कि ऐसी आपदाएं अक्सर पूर्व संकेत दिए बिना घटित होती हैं और इनकी पुनरावृत्ति संभावित है। रात्रि के समय बादल फटने की घटनाएं अधिक होती हैं और ज्यादा नुकसान दायक होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्ष के संवेदनशील महीनों में विशेष सतर्कता बरतते हुए पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व योजना बनानी चाहिए। इससे जन—धन की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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