हिमालयी पहाडिय़ों की वास्तुकला को संरक्षित करने की वकालत

  • डीआईटी विवि में वास्तुकला वृत्तांत पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

देहरादून। डीआइटी विश्वविद्यालय के स्कूल आफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग ने वीएनआईटी नागपुर और आईआईटी रुड़की के सहयोग से उत्तराखंड के वास्तुकला वृत्तांत विषय पर पांच दिवसीय लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम (एसटीटीपी) शुरू हो गया है। कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को एफआरआई देहरादून, आईआईटी रुड़की, मसूरी और बिसोई गांव जैसी वास्तुकला धरोहर स्थलों के भ्रमण, व्याख्यानों और विशिष्ट वास्तुकला पहचान से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम का उद्घाटन डीआइटी विवि के कुलपति डा. जी रघुरामा ने किया। उन्होंने हिमालयी पहाडियों की वास्तुकला पहचान को संरक्षित करते हुए नवाचार और स्थिरता को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहयोगात्मक शैक्षणिक प्रयास अनुसंधान को सशक्त बनाते हैं। आईआईटी रुड़की के एसोसिएट प्रोफेसर डा. रामसतीश पसुपुलेटी ने क्षेत्रीय वास्तुकला समझ को गहरा करने में अंतर-संस्थागत सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं डीआइटी विवि की डीन डा.  एकता सिंह ने छात्रों को जीवंत परंपराओं से सीखने और अतीत की बुद्धिमत्ता को भविष्य के डिजाइन से जोड़ने का आग्रह किया। उद्घाटन सत्र में पूर्व प्रमुख सचिव डा. उमाकांत पंवार पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं डा. लोकेश ओहरी ने हिमालय में जीवन:  पहाडै वास्तुकला के दृष्टिकोण विषय पर व्याख्यान दिया।
इस मौके पर आर्किटेक्ट जितेन्द्र सरोही, डा. अखिलेश कुमार, डा. पंकज वर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त किये।

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