होलिस्टिक लर्निंग सेंटर की घोषणा…ऑटिज्म प्रभावित बच्चों व वयस्कों के शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक विकास पर जोर

– मायरा केयर फाउंडेशन ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस से पहले फैलाई जागरूकता की लहर

देहरादून। विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में मायरा केयर फाउंडेशन ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार से प्रभावित बच्चों व वयस्कों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने और समावेशिता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। नीले रंग की थीम में सजे कार्यक्रम में होलिस्टिक लर्निंग सेंटर की घोषणा की।
बुधवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी ने कहा कि भारत में ऑटिज्म प्रभावित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण उनके परिवार सामाजिक, शैक्षिक और चिकित्सकीय चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय पर हस्तक्षेप से 80 प्रतिशत मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। सह-संस्थापक डॉ. जया नवानी (मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार विज्ञान विशेषज्ञ) ने उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में संसाधनों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में इन बच्चों की उपेक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने समावेशी वातावरण बनाने पर जोर देते हुए कहा कि स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों में ऑटिज्म प्रभावित व्यक्तियों के लिए बाधारहित माहौल तैयार करना आवश्यक है। मायरा केयर फाउंडेशन की ऑपरेशन्स हेड अनीता शर्मा ने देहरादून में स्थापित हो रहे होलिस्टिक लर्निंग सेंटर की विस्तृत योजना साझा की। उन्होंने कहा कि सेंटर ‘एक छत के नीचे सब कुछ’ मॉडल पर आधारित होगा जिसमें ऑटिज्म प्रभावित बच्चों व वयस्कों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेंटर
व्यक्तिगत लर्निंग प्लान के तहत विशेष शिक्षा कार्यक्रम, स्पीच, ऑक्यूपेशनल और बिहेवियरल थेरेपी, कला चिकित्सा, योग तथा अन्य समग्र विकास गतिविधियां, माता-पिता के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं और काउंसलिंग, व्यस्कों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि
सेंटर की प्रारंभिक क्षमता 2026 के अंत तक 50 बच्चों की होगी जिसके बाद विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल यूनिट्स शुरू की जाएंगी। फंडिंग के लिए कॉर्पोरेट पार्टनरशिप और सरकारी सहयोग पर जोर दिया गया।
अनीता शर्मा ने जोर देकर कहा कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की प्रतिभा है। हमें इसे समझना और समर्थन देना होगा।

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