देहरादून। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में सामाजिक, औद्योगिक और पर्यावरणीय समस्याओं के नवाचारी समाधान खोजने के लिए 72 घंटे की मेगा हैकाथॉन ‘ग्राफ-ए-थॉन 3.0’ शुरू हो गई है।
देशभर के 23 राज्यों से आई 100 छात्र टीमों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, एग्रीटेक और साइबर सिक्योरिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में AI आधारित व्यावहारिक समाधान विकसित करने की चुनौती स्वीकार की है। सभी टीमें लगातार 72 घंटे (तीन दिन-तीन रात) कैंपस में रहकर सॉफ्टवेयर और प्रोटोटाइप तैयार करेंगी।
कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स:
– ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी की टीम AI आधारित लैब असिस्टेंट विकसित कर रही है।
– मुंबई की ठाकुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की टीम मानसिक स्वास्थ्य की शुरुआती पहचान के लिए AI सिस्टम बना रही है।
– चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की टीम राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए स्मार्ट सिंचाई प्रणाली पर काम कर रही है।
– वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) की टीम ऑटोमेटेड डिफेंस ड्रोन सिस्टम विकसित कर रही है।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की टीम आपदा के समय मलबे में फंसे लोगों को खोजने वाली तकनीक पर कार्य कर रही है।
इस हैकाथॉन का उद्घाटन यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमित आर. भट्ट, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ और कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।
यह आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (TBI) द्वारा दोनों यूनिवर्सिटीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
