– डिजिटल ऑडिट और बायोमेट्रिक सिस्टम होगा अनिवार्य
– 79 कॉलेजों पर कार्रवाई की तैयारी
नई दिल्ली/देहरादून। देश में दंत चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल डेंटल कमीशन (NDC) ने बड़ा कदम उठाया है। सबस्टैंडर्ड डेंटल कॉलेजों और ‘घोस्ट फैकल्टी’ पर लगाम कसने के लिए अब केंद्रीकृत बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और वर्षभर डिजिटल ऑडिट अनिवार्य किए जाएंगे।
हाल ही में 78 वर्ष पुराने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) के स्थान पर गठित NDC ने साफ संकेत दिए हैं कि अब केवल कागजों में चल रहे कॉलेजों और रिकॉर्ड में फर्जी फैकल्टी दिखाने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। यह नई व्यवस्था देशभर के 325 से अधिक डेंटल कॉलेजों पर लागू होगी, जिनमें करीब 28 हजार बीडीएस और 7,300 एमडीएस सीटें शामिल हैं।
NDC अध्यक्ष डॉ. संजय तिवारी ने कहा कि आयोग का प्राथमिक लक्ष्य नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि अब निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, जिसमें क्लिनिकल टीचिंग की गुणवत्ता, शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति, पर्याप्त मरीजों की उपलब्धता और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की विशेष जांच होगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डेंटल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (DARB) को विशेष अधिकार दिए गए हैं। यह बोर्ड बिना पूर्व सूचना के किसी भी डेंटल कॉलेज का निरीक्षण कर सकेगा और उसकी रेटिंग सार्वजनिक करेगा। बोर्ड का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नंद किशोर साहू कर रहे हैं, जबकि डॉ. हिमांशु ऐरन पूर्णकालिक सदस्य हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कई कॉलेज अब तक रिकॉर्ड में फर्जी या अनुपस्थित डॉक्टरों को दिखाकर शिक्षक-छात्र अनुपात पूरा करते रहे हैं। पुराने फिजिकल निरीक्षण सिस्टम में इस तरह की गड़बड़ियों की संभावना रहती थी, जिसे अब डिजिटल निगरानी और बायोमेट्रिक व्यवस्था के जरिए खत्म करने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, अगले 4 से 5 महीनों में करीब 79 सबस्टैंडर्ड डेंटल कॉलेजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। यदि किसी संस्थान में बुनियादी सुविधाओं की कमी या ‘घोस्ट फैकल्टी’ पाई गई, तो उसे बंद करने तक का निर्णय लिया जा सकता है। इसके साथ ही NDC ने भविष्य की दो अहम पहलों पर भी काम शुरू कर दिया है। इनमें नेशनल एग्जिट टेस्ट (NExT) को अगले तीन वर्षों में लागू करना और निजी डेंटल कॉलेजों व डीम्ड विश्वविद्यालयों में फीस पर 50 प्रतिशत तक सीमा तय करने का रोडमैप शामिल है।
NDC की यह पहल देश में दंत चिकित्सा शिक्षा के स्तर को सुधारने, अनियमितताओं पर रोक लगाने और छात्रों के लिए शिक्षा को अधिक सुलभ, पारदर्शी और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
