देहरादून। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उत्तराखंड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों ने रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। इस दौरान शिक्षकों ने नारेबाजी कर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना था कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने वर्षों पहले नियमानुसार नियुक्ति प्राप्त की थी, लेकिन अब नई शर्तें लागू होने से उनकी सेवाओं पर संकट खड़ा हो गया है। शिक्षक नेताओं ने बताया कि कई शिक्षक दो दशक से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं और नियुक्ति के समय टीईटी की बाध्यता नहीं थी। ऐसे में लंबे समय बाद इसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान की जाए।प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में अध्यादेश लाकर शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित करने और टीईटी अनिवार्यता में राहत देने की मांग की गई। संघ के जिलाध्यक्ष सूरज मंद्रवाल ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में संघ के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।
