रामगढ़ प्राथमिक विद्यालय में परख आकलन में मिले 78.4% अंक

– विद्यालय प्रबंधन समिति की विशेष बैठक में विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार

रामगढ़। दक्षता आधारित आकलन ‘परख’ के परिणामों की समीक्षा और विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में सुधार के लिए राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ में विद्यालय प्रबंधन समिति की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानाध्यापक अरविन्द सिंह सोलंकी ने अभिभावकों को पांच अक्टूबर 2026 को आयोजित आकलन के परिणामों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय के विद्यार्थियों ने इस आकलन में 78.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। अब शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों से इस उपलब्धि को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में विद्यार्थियों की उन दक्षताओं की पहचान की गई, जिनमें अपेक्षित उपलब्धि हासिल नहीं हो पाई है। इसके बाद कक्षावार, विद्यार्थीवार और विषयवार सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई। प्रधानाध्यापक ने कहा कि विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार के लिए विद्यालय के साथ-साथ अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। घर पर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने, नियमित अभ्यास कराने और उनकी शैक्षिक प्रगति की निगरानी करने पर जोर दिया गया।

नियमित विद्यालय आने पर दिया जोर

बैठक में अभिभावकों को अर्धवार्षिक परीक्षा की समय-सारणी की जानकारी दी गई। साथ ही उनसे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने की अपील की गई, ताकि उनकी पढ़ाई निरंतर बनी रहे और सीखने की प्रक्रिया बेहतर हो सके। इस दौरान विभाग की ओर से विद्यार्थियों के बैग और जूते के लिए प्राप्त धनराशि के उपयोग पर भी चर्चा की गई। प्रत्येक विद्यार्थी की अपार आईडी (APAAR ID) के महत्व की जानकारी देने के साथ ही विद्यालय के विकास से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

शिक्षकों और अभिभावकों ने लिया सहयोग का संकल्प

विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में प्रधानाध्यापक अरविन्द सिंह सोलंकी, सहायक अध्यापक मीना घिल्डियाल, वीरेंद्र उनियाल और वीरेंद्र सिंह सहित सविता, अंजू देवी, लक्ष्मी, मंजू देवी, मोनी, रितु, रानी, दुलारी देवी, रूमा देवी, फराना सरस्वती, शबनूर, केशवर जहां, रेखा, मेहशर बीबी, अंजना और सीमा देवी समेत अभिभावक उपस्थित रहे। बैठक में विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धियों को बेहतर बनाने, कमजोर दक्षताओं में सुधार करने और विद्यालय के समग्र विकास के लिए शिक्षकों तथा अभिभावकों के आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

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