एआई वरदान या अभिशाप? माया देवी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों ने रखे तर्क, अवंतिका रावत ने मारी बाजी

देहरादून। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानवता के लिए वरदान है या अभिशाप? इस सवाल पर माया देवी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों ने अपने तर्कों से विचार-मंथन किया। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी की ओर से मिनी ऑडिटोरियम में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने एआई के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर विचार रखे। प्रतियोगिता में कृषि संकाय की अवंतिका रावत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. महेंद्र सिंह पाल के नेतृत्व में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता, वक्तृत्व कला और आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूकता विकसित करना था। प्रतियोगिता के दौरान एआई के पक्ष में बोलने वाले विद्यार्थियों ने शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्योग और संचार के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जटिल कार्यों को आसान बनाने, उत्पादकता बढ़ाने और बेहतर निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वहीं, विपक्ष में बोलने वाले विद्यार्थियों ने रोजगार के अवसरों पर संभावित प्रभाव, डेटा गोपनीयता, साइबर अपराध, भ्रामक सूचनाओं और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि एआई का अत्यधिक इस्तेमाल मानवीय सोच और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। चर्चा में तकनीक के जिम्मेदाराना उपयोग और मानवीय निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

प्रो. महेंद्र सिंह पाल ने कहा कि एआई शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और अनुसंधान समेत प्रत्येक क्षेत्र में बदलाव ला रही है। विद्यार्थियों को इसके सकारात्मक और जिम्मेदार उपयोग की समझ विकसित करनी चाहिए। वाइस प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा कि तकनीकी विकास के साथ मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कुलपति प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने कहा कि विद्यार्थियों को तकनीक के उपयोग के साथ उसके सामाजिक प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण भी करना चाहिए। निर्णायक मंडल में डीन एकेडमिक्स डॉ. आरबी सिंह, डीन स्कूल ऑफ लॉ डॉ. एके दीक्षित और डीन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट डॉ. अंजू थापलियाल शामिल रहे। प्रतियोगिता में अवंतिका रावत (तृतीय वर्ष, कृषि संकाय) प्रथम, दीक्षा (द्वितीय वर्ष, विधि संकाय) द्वितीय और खुशी भारती (तृतीय वर्ष, कृषि संकाय) तृतीय स्थान पर रहीं। विजेताओं को ट्रॉफी और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनय, डॉ. प्रज्ज्वल, डॉ. शिवानी, डॉ. शुभम, डॉ. साहिल, सुश्री शिवानी और सुश्री अंबिका ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, प्राचार्य और शिक्षक मौजूद रहे।

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