– एक साल में 28 पायदान का सुधार, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के क्षेत्र में उत्तराखंड में दूसरा स्थान
देहरादून। उत्तरांचल विश्वविद्यालय ने वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करते हुए क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स : एशिया-2027 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने दक्षिण एशिया में 302वां स्थान प्राप्त किया है, जबकि एशिया की समग्र रैंकिंग में 951-1000 के बैंड में जगह बनाई है। पिछले वर्ष पहली बार इस रैंकिंग में शामिल होने के बाद विश्वविद्यालय ने दक्षिण एशिया में 28 पायदान की छलांग लगाई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के मानक पर उत्तराखंड में दूसरा स्थान हासिल कर विश्वविद्यालय ने प्रदेश की शैक्षणिक उपलब्धियों में भी योगदान दिया है।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स : एशिया-2027 में एशिया के कुल 1722 उच्च शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें भारत के 325 विश्वविद्यालय और संस्थान भी शामिल हैं। ऐसे प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक परिदृश्य में उत्तरांचल विश्वविद्यालय का बेहतर प्रदर्शन उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता में हो रहे सुधार को दर्शाता है।
विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान, संस्थागत प्रतिष्ठा, शैक्षणिक गुणवत्ता और सतत विकास से जुड़ी पहलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इससे शोध और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती सक्रियता को भी पहचान मिली है। इस उपलब्धि के साथ उत्तरांचल विश्वविद्यालय ने आईआईटी दिल्ली, आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ क्यूएस एशिया रैंकिंग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेंद्र जोशी, उपाध्यक्ष अंकिता जोशी, कार्यकारी निदेशक (छात्र मामले एवं आईटी) डॉ. अभिषेक जोशी और कुलपति प्रो. धर्म बुद्धि ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए इसे सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत करने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान में गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने और साक्ष्य आधारित मूल्यांकन व्यवस्था विकसित करने में प्रकोष्ठ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इस अवसर पर आईक्यूएसी के निदेशक इंजीनियर राजेश देवराड़ी, सहायक प्रबंधक इंजीनियर सुधीर जुगरान, सभी संकाय सदस्यों और अन्य सहयोगियों को भी बधाई दी गई। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कहा कि यह उपलब्धि भविष्य में शोध, नवाचार और वैश्विक शैक्षणिक सहभागिता को और विस्तार देने की प्रेरणा बनेगी।