उत्तराखंड के सभी संस्थानों में लागू होगा एईबीएएस सिस्टम

  • श्री देव भूमि इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन साईंस एण्ड टैक्नोलॉजी में एईबीएएस पर कार्यशाला आयोजित 
  • एईबीएएस को बताया गुड गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

देहरादून। श्री देव भूमि इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन साईंस एण्ड टैक्नोलॉजी में इंप्लीमेंटेशन आफ एईबीएएस विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने एईबीएएस के लाभ तथा इससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला

पौधा स्थित संस्थान में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया (पीसीआई) के उपाध्यक्ष जस्सुभाई हीराभाई चौधरी,  और सेंट्रल काउंसिल मेंबर डा विभु साहनी व डा शिवानंद पाटिल एवं संस्थान के अध्यक्ष श्रीनिवास नौटियाल ने किया। मुख्य अतिथि जस्सुभाई हीराभाई चौधरी ने कहा कि एईबीएएस केवल एक उपस्थिति दर्ज करने वाली प्रणाली नहीं है, बल्कि ई’गवर्नेंस और गुड गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस तकनीक का उपयोग करते हुए अपने प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना होगा। उन्होंने कहा कि अब पीसीआई स्क्लि डेवलपमेंट इन क्वालिटी कंट्रोल तथा स्क्लि डेवलपमेंट इन एआई जैसे प्रोग्राम को भी प्रारंभ कर रहा हैं। इस काम को आगे जारी रखने के लिये पीसीआई  प्रत्येक राज्य के स्टेट काउंसिल को एक करोड़ रुपये देने की बात कही। इसके अलावा पीसीआई ने संस्थानों की सुविधा के लिए उत्तराखंड समेत चार राज्यों में जोन भी स्थापित किए हैं। साथ ही तीन को ऑर्डिनेटर भी बनाये गये हैं जिसमें डा रेनु, डा शिवानंद पाटिल, डा विभु साहनी शामिल हैं।
डा विभु साहनी ने कहा कि एईबीएएस को जल्द से जल्द अपने संस्थान में लागू करें, ताकि  फार्मेसी में पारदर्शिता बनी रहे।

इस दौरान हेड आफिस से एईबीएएस की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई । पीसीआई ने उतराखण्ड राज्य के सभी संस्थानों को एईबीएएस सिस्टम को 100 प्रतिशत लागू करने के भी निर्देश दिये। विशेषज्ञों ने यह भी स्वीकार किया कि नेटवर्क और कनेक्टिविटी, कुछ मामलों में बायोमेट्रिक विफलता, उपकरणों का रखरखाव, और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता जैसी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिन्हें प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों से दूर किया जा सकता है।

संस्थान के अध्यक्ष श्रीनिवास नौटियाल तथा निदेशक डॉ शिवानन्द पाटिल ने अतिथियों का आभार जताया।

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