पुस्तक “उत्तराखंड के पहाड़ताली लोकगीत” का लोकार्पण

  • लोक गायकों ने दी लोकगीतों की प्रस्तुति 

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में डॉ सुशीला पाल एवं डॉ राजेश पाल द्वारा संकलित हरिद्वार एवं देहरादून जिले की तराई में गाने गाए जाने वाले लोकगीतों के संकलन की पुस्तक “उत्तराखंड के पहाड़ताली लोकगीत” का लोकार्पण किया गया। इस दौरान इन लोकगीतों का लोक गायको द्वारा प्रस्तुतीकरण भी किया गया ।

लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान पुस्तक पर चर्चा भी की गई जिसमें साहित्यकार डॉ नंदकिशोर हटवाल ने कहा कि पुस्तक हरिद्वार व देहरादून जिलों के लोकगीतों की मौलिक पुस्तक है। उत्तराखंड के गढ़वाली कुमाऊनी जौनसारी लोकगीतों की परंपरा में मैदानी क्षेत्र के लोकगीतों का संकलन आ जाने से उत्तराखंड के लोकगीतों का एक समग्र अध्ययन संभव हो सकेगा । डॉक्टर सुरेंद्र दत्त सेमल्टी ने कहा कि लोकगीत इतने विविध और समृद्ध हैं। संकलनकर्ता डॉ. सुशीला पाल ने कहा कि इन लोकगीतों पर कार्य करना उतना ही आवश्यक और रुचिकर रहा है जितना की जल और जंगल को बचाए रखना। डॉ. राजेश पाल ने बताया कि लुफ्त होते यह गीत अपने अंदर एक वृहद संस्कृति को समेटे हुए हैं। इनका लुप्त होना निश्चित ही एक अमूल्य लोक निधि की अपूरणीय क्षति है। इन लोकगीतों को संकलित कर अपने भीतर एक संतुष्टि का अनुभव कर रहे हैं क्योंकि इन लोकगीतों का लुप्त होना एक अमूल्य संस्कृति का लुप्त होना है। डॉ. सुशीला पाल राजकीय इंटर कॉलेज होरावाला में हिंदी की शिक्षिका है, जबकि डॉ राजेश पाल एक साहित्यकार और डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून में गणित के प्रोफेसर है।

इस अवसर पर डॉ. सुशीला पाल के साथ मिलकर रजनी नेगी, अनीता रायचमेली, पूनम पाल एवं प्रीति तोमर ने कई तरह के पहाड़ताली लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी जिसे श श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक इतिहासकार डॉ. योगेश धस्माना ने किया।

इस मौके पर प्रोग्राम एसोसिएट चंद्रशेखर तिवारी, कवि राजेश सकलानी, कथाकार जितेन ठाकुर, बिजू नेगी, एश्वर्य मिश्रा, डॉ.अरुण कुकसाल, अम्मार नकवी, दिनेश चन्द्र जोशी, अरुण असफल, हिमांशु आहूजा, देवेन्द्र काण्डपाल, डॉ. लालता प्रसाद, कुल भूषण नैथानी, कुसुम नौटियाल, शमा खान, प्रो रामविनय सिंह, डा. रवि दीक्षित, डा. प्रदीप कोठियाल, प्रेम बहुखंडी, प्रवीन भट्ट, सुंदर सिंह बिष्ट, हरि चंद निमेष,समदर्शी बड़थ्वाल, गजेन्द्र नौटियाल समेत अनेक लेखक, साहित्यकार, रंगकर्मी, युवा पाठक व अन्य साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

 

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