देहरादून/बद्रीनाथ

बदरीनाथ धाम के कपाट आज विधि- विधान से जय बदरीविशाल के उदघोष के साथ रात्रि 9 बजकर 07 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद हो गये हैं।

आज कपाट बंद होने के दिन दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

इसबार सवा 14 लाख से अधिक संख्या में तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम के दर्शन किये हैं। मंदिर समिति ने तीर्थयात्रियों के सरल सुगम दर्शन व्यवस्था की। कल सुबह बद्रीनाथ जी की डोली पांडुकेश्वर के लिए रवाना होगी।

आज श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दिन कोटद्वार विधायक दिलीप रावत,स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती,श्री बदरीनाथ’ केदारनाथ मंदिर समिति उपाध्यक्ष किशोर पंवार, जिलाधिकारी संदीप तिवारी मंदिर समिति सदस्य वीरेंद्र असवाल, पुष्कर जोशी, आशुतोष डिमरी, भास्कर डिमरी बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ,अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी,मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, ईओ नगर पंचायत सुनील पुरोहित, थाना प्रभारी नवनीत भंडारी ,प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट राजेंद्र सेमवाल,मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, विनोद डिमरी, पीताम्बर मोल्फा,अजीत भंडारी,योगंबर नेगी,अजय सती, अनसूया नौटियाल, दिनेश भट्ट सहित मंदिर समिति के सभी अधिकारी कर्मचारी, डिमरी पंचायत प्रतिनिधि,हक हकूहकधारी एवं बड़ी संख्या में तीर्थयात्री मौजूद रहेंl

 

 

15.11.24 वाराणसी।

आज काशी के केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में देव दीपावली के पावन अवसर पर उद्गार व्यक्त करते हुए परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती 1008 जी महाराज ने कहा कि मनुष्यों एवं देवताओं के मध्य सामंजस्य स्थापित करने का पर्व है देव दीपावली।आज के दिन धरती पर सभी देवता पधार कर दीपार्चन स्वीकार कर रहे हैं।उन देवताओं से साथ एकाकार होने का इससे सुंदर अवसर दूसरा नही हो सकता है।आज आसमान पर जितने तारे दिखाई देंगे नीचे धरती पर देखने पर उतने ही दीप दिखाई देंगे।आज जो लोग बहुत भाग्यशाली हैं वो काशी में उपस्थित हैं।हम समस्त लोगों को शुभकामना देते हैं।आज कार्तिक पूर्णिमा व देव दीपावली के पावन अवसर पर श्रीविद्यामठ में शंकराचार्य जी महाराज के सान्निध्य में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का मेवे से श्रृंगार और आंवले से अर्चन किया गया।सत्यनारायण भगवान की कथा हुई जिसमें यजमान के भूमिका में अभय शंकर तिवारी सपत्नीक उपस्थित थे।

उक्त जानकारी देते हुए परमधर्माधीश शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि परमधर्माधीश शंकराचार्य जी महाराज दीपावली प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में मनाते हैं इसलिए श्रीविद्यामठ में आज के ही दिन सन्त,भक्त व वैदिक छात्र मिलकर दीपावली मनाया।जिसके अनन्तर पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज आकाशदीप प्रज्ज्वलित किया और दीपदान किया।साथ ही पूज्यपाद महाराजश्री मठ मौजूद सैकड़ों वैदिक विद्यार्थियों के मध्य पटाखा वितरित किया जिसे भगवती गंगा के तट पर वैदिक बच्चों ने पटाखा फोड़ा।

 

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सर्वश्री:-साध्वी पूर्णाम्बा दीदी,साध्वी शारदाम्बा दीदी,ब्रम्हचारी परमात्मानंद,सजंय पाण्डेय मीडिया प्रभारी,अनिल भारद्वाज,स्वामी नरेंद्रानंद,स्वामी भगवतानंद,ब्रम्हचारी सर्वभूत हृदयानंद,रवि त्रिवेदी,शैलेन्द्र योगी,रमेश उपाध्याय,सुनील उपाध्याय,हजारी सौरभ शुक्ला,किशन जायसवाल,सक्षम सिंह योगी,मनीष पाण्डेय,सुनील शुक्ला सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।

 

 

देहरादून। सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने विगत दो दिनों से देहरादून राजपुर रोड के कन्या गुरुकुल महाविद्यालय में चल रही जिला स्तरीय संस्कृत छात्र प्रतियोगिताओं का निरीक्षण किया।

 

*इस अवसर पर जनपद के सभी विकास खंडों से उपस्थित प्रतिभागियों , प्रधानाचार्यों एवं शिक्षक- शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रावण को अपने ज्ञान का अभिमान था ,जबकि श्री राम को अपने अभिमान का ज्ञान था, इसलिए प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने से छात्र-छात्राओं को हार एवं जीत कोई भी मिले समभाव से रहने का स्वभाव प्राप्त होता है, और इससे ही सच्चे मानव का निर्माण होता है।*

 

प्रतियोगिताओं के आयोजन पर जनपद संयोजक राजकीय इंटर कॉलेज सभा वाला के प्रधानाचार्य डॉक्टर गीता राम नौटियाल को भविष्य के लिए आवश्यक सुझाव देते हुए सहायक निदेशक ने कहा कि संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को भी अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग कराया जाए इसलिए संस्कृत अकादमी द्वारा मार्गदर्शन की जिम्मेदारी मुख्य शिक्षा अधिकारी को दी जाती है, और उनके द्वारा यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई जा रही है। *इस बीच अपने आदर्श उच्च अधिकारी को अपने बीच पाकर बच्चों में उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए होड़ लगी रही।*

कार्यक्रम में पहुंचने पर जनपद संयोजक डॉक्टर जी आर नौटियाल ने सहायक निदेशक का धन्यवाद अदा करते हुए उन्हें मुख्य शिक्षा अधिकारी की तरफ से स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र भेंट कर फूल माला पहनाते हुए कहा कि उनके द्वारा शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए निरंतर किए जा रहे कार्यों से पूरा शिक्षा जगत गौरवान्वित हो रहा है। मौके पर जनपद सहसंयोजक डॉ मनोज शर्मा, डॉ नवीन भट्ट, प्रोफेसर शैलेंद्र डंगवाल, विनीत कुकसाल, सहित बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 

 

वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, दीपावली 2024 से पहले 5 बड़े ग्रह नक्षत्र परिवर्तन करने वाले हैं, जिनमें से कुछ कर भी चुके हैं। ऐसे में इन ग्रहों के परिवर्तन से कुछ राशि वाले जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है, तो कुछ राशि वालों को बुरे फलों की प्राप्ति हो सकती है।

*उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ ” सौरमंडल का विश्लेषण करते हुए बताते हैं, कि वैदिक ज्योतिष में गोचर का मतलब होता है ग्रहों की चाल। जब कोई ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में जाता है तो उसे गोचर कहते हैं। ये गोचर हमारे जीवन पर काफी असर डालते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सभी ग्रह अलग-अलग समय पर राशि परिवर्तन करते हैं। जब कोई ग्रह राशि परिवर्तन करता है तो उसका शुभ और अशुभ प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है।*

 

आचार्य दैवज्ञ के अनुसार हाल ही में, 23 अक्टूबर 2024 को बुध ग्रह का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश हुआ, उसके बाद, 24 अक्टूबर को गुरु बृहस्पति स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर गए इसके साथ ही, शुक्र और मंगल भी अपने नक्षत्र में बदलाव कर रहे हैं। 27 अक्टूबर को शुक्र ज्येष्ठा में और 28 अक्टूबर को मंगल पुष्य नक्षत्र में गोचर करेगा। फिर 29 अक्टूबर को बुध वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। उसके बाद 30 अक्टूबर को वरुण ग्रह यानी नेपच्यून पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे।

 

*मन्त्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित कर जीवन की समस्याओं का समाधान करने वाले डॉक्टर दैवज्ञ के अनुसार, यद्यपि इन सभी नक्षत्र परिवर्तन का असर 12 राशियों पर पड़ने वाला है। लेकिन यदि जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति को सुधार दिया जाए तो इनमें से 5 राशियों के जातकों के लिए ये समय काफी शुभ हो सकता है।*

 

*मेष राशि*

 

इस राशि के लोगों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है। व्यापार में बड़ा मुनाफा हो सकता है। समाज में मान-सम्मान भी बढ़ेगा। खोया हुआ प्यार वापस मिल सकता है। प्रेम जीवन में खुशियों का माहौल रहेगा।

 

*सिंह राशि*

 

इस राशि के जातकों के लिए समय भाग्यशाली साबित होने वाला है। नौकरीपेशा हैं, तो आपका प्रमोशन हो सकता है। नई नौकरी के अवसर भी खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। प्रेम जीवन में बड़े बदलाव हो सकते हैं।

 

*तुला राशि*

 

तुला राशि वाले जातकों के लिए यह समय शुभ साबित होगा। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। धार्मिक कार्यों में मन लगेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। व्यापार में लाभ होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

 

*धनु राशि*

 

धनु राशि के जातकों को दिवाली से पहले यात्रा करनी पड़ सकती है। यह यात्रा आपके लिए शुभ साबित होगी। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। पार्टनर के साथ खूबसूरत समय बिताने का मौका मिलेगा।

 

*कुंभ राशि*

 

कुंभ राशि वाले जातकों को लाभ ही लाभ मिलने वाला है। आमदनी का नया जरिया मिलेगा। मां लक्ष्मी की बरसेगी। घर में सुख-शांति बनी रहेगी। घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।

 

जन्म कुंडली में ग्रहों की सूक्ष्म स्थिति को पकड़कर सामान्य स्थिति वाले को ऊंचे दर्जे पर और ऊंचे दर्जे वाले को नीचे दर्ज पर पहुंचा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रसिद्ध डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल” दैवज्ञ” का कहना है ,कि इस दीपावली पर जो उत्तम ग्रह स्थिति बन रही है, उसमें जीवन की किसी भी समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के लिए संबंधित ग्रह का यंत्र सिद्ध करने से पूर्ण रूप से लाभ की स्थिति बन सकती है। और उस दिन वह संपर्क में चल रहे लोगों की सफलता के लिए यंत्रों की सिद्धि करेंगे।

आचार्य जी का संक्षिप्त परिचय

नाम आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल” दैवज्ञ ”

राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित सहायक निदेशक शिक्षा – संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड सरकार/

निवास स्थान 56 / 1 धरमपुर देहरादून फ़ोन no 9411153 845 एवं 701788 6131

उपलब्धियां

वर्ष 2013 में सबसे पहले केदारनाथ आपदा की भविष्यवाणी की थी इसलिए 2018 तक लगातार मिला” एक्सीलेंस अवॉर्ड”

वर्ष 2015 में शिक्षा विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने पर मिला राज्य का” प्रथम गवर्नर अवार्ड”

लगातार सटीक भविष्यवाणियां करने पर वर्ष 2016 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिया “उत्तराखंड ज्योतिष रत्न सम्मान ”

मंत्रो की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित करने का विज्ञान विकसित करने के लिए वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया “ज्योतिष वैज्ञानिक” सम्मान /

वर्ष 2018 एवं 2019 में राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में उत्तराखंड सरकार ने लगातार दिया” ज्योतिष विभूषण सम्मान”

नवंबर 2022 में लगातार सटीक भविष्यवाणी करने पर ग्राफिक एरा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोबारा से दिया “उत्तराखंड ज्योतिष रत्न सम्मान ”

इसके अतिरिक्त भी पूरे देश एवं विदेशों में 700 से अधिक श्रीमद् भागवत कथाओं का प्रवचन करते हुए अनेक “राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान उपाधियों” से हुए हैं सम्मानित/

सहायक निदेशक के रूप में फरवरी 2023 में मिला “ऑफिसर ऑफ द ईयर अवार्ड” सम्मान।

शिक्षा अधिकारी के रूप में उत्कृष्ट कार्यो के लिए 24 दिसंबर 2023 को राज्यसभा सांसद नरेश बंसल के हाथों से मिला “सुशासन के सूत्रधार अधिकारी सम्मान”

8 जनवरी 2024 को शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा में मूलभूत सुधार करने एवं ज्योतिष के क्षेत्र में सटीक भविष्यवाणियों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में दिया” ज्योतिष सूर्य सम्मान”

 

देश के अन्य हिस्सों में दीपावली पर्व 31 अक्टूबर जबकि उत्तराखंड में 1 नवंबर को मनाना शास्त्र सम्मत: डॉ घिल्डियाल ।

देहरादून । दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को है ?अथवा 1 नवंबर 2024 को है ? *इस विषय पर देश के विद्वानों में सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” का बहु प्रतीक्षित निर्णायक बयान आया है । उन्होंने कहा है कि पर्व निर्णय़ घर्मशास्त्र का विषय़ है , औऱ कालगणना करना ज्योतिष का विषय है । सूर्योदय और सूर्यास्त में देशान्तर के कारण भारत में ही एक घन्टे से / 30 / 40 /50 मिनटों तक का भी अन्तर आ जाता है । भारत के विभिन्न नगरों का अक्षान्तर देशान्तर अलग अलग होने के कारण पर्व निर्णयों में भी समानता नहीं हो पाती है।* स्वदेशी पंचांग गणना के आधार पर ही पर्वनिर्णय मान्य होता है ।
सौर वैज्ञानिक डॉक्टर दैवज्ञ ने स्पष्ट किया है ,कि काशी विद्वत परिषद ने स्थानीयकाल की गणना कर शास्त्र प्रमाण के आधार पर 31 अक्टूबर को दीपावली करने का निर्णय दिया है। अन्य प्रदेशों के विद्वत परिषदों ने भी स्थान काल गणना के आधार पर किसी ने 31 अक्टूबर 2024 तो किसी ने 1 नवम्बर 2024 को दीपावली मनाने का निर्णय दिया है।*

सटीक भविष्यवाणियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात आचार्य चंडी प्रसाद दैवज्ञ का कहना है ,कि उत्तराखंड़ /गढ़वाल मंडल के सभी पंचांग अक्षांस 28-30 से 29-30 उत्तर के मान के आधार पर ही बनते हैं , रेलवे टाइम से 10 मिनट से अधिकतम 18 मिनट का ही अन्तर होता है इसलिए यहां सभी पर्व एक ही दिन एक ही समय में मनाए जाते हैं ।
सम्बत 2081 सन् २०२४ को कार्तिक कृष्ण अमावास्या दि० 31अक्टुबर /1नवम्बर दोनों दिन है ,अब प्रश्न उठा कब मनायें ? धर्मशास्त्र, निर्णयसिन्धु निर्णयानुसार महालक्ष्मीपूजन दीपोत्सव प्रदोष काल या नीशीथकाल में अमावास्या होने पर ही हो सकता है । इस वर्ष दोनों दिन प्रदोष काल में अमावास्या आ रही है इसलिए विद्वानों का कर्तब्य है समाज को सही मार्ग दर्शन करे ।
*निर्णय*
वाणीभूषण पंचांग एवं महीधर पंचांगानुसार 1 नवम्बर 2024 को सूर्योदय से उदया कार्तिक दर्श अमावास्या 29घटी 16 पल तक है , सूर्यास्त के पश्चात भी 52 मिनट तक है , अर्थात् प्रदोष काल में विद्यमान है । उदयातिथि को धर्म शास्त्रों ने पुण्य दायी होने से अधिक महत्व दिया है।
*प्रदोषो$स्तमयादूर्ध्वं घटिकाद्वयमिष्यते। अर्थात सूर्यास्त के पश्चात दो घटी तक जो तिथि हो तो वह प्रदोष व्यापिनी तिथि कही गयी है। धर्मसिन्धु के अनुसार दोनों दिन प्रदोष में अमावस्या हो तो परा लेने का निर्णय किया गया है *”अस्तोत्तरंघटिकाधिकरात्रीव्यापिनी दर्शे सति न सन्देह ” अर्थात सूर्यास्त के बाद 1 घटी भी दर्श अमावस्या हो तो सन्देह नहीं करना चाहिए। अर्थात उसी दिन पर्व मनाना चाहिए । सभी शास्त्रोंके वचनों पर गहनता से विचार करने के पश्चात निर्णयसिन्धु मतानुसार उत्तराखंड प्रदेश अर्थात गढ़वाल, कुमाऊँ क्षेत्र में 1 नवम्बर 2024 को 6बजकर 16 मिनट तक दीपोत्सव लक्ष्मीपूजन करना श्रेयष्कर रहेगा। महा निशीथ काल में पूजा के पक्षधर या उस समय पूजा करने वालों को 31अक्टूबर 2024 का दिन श्रेयष्कर है। अत: *ग्राम वचनं यथा कुर्यु:* अर्थात् अपने कुल ग्राम देश की परम्परानुसार ही पर्व त्योहारों को मनाना चाहिए ।

*उत्तराखंड ज्योतिष रत्न ने स्पष्ट निर्णय दिया है, कि उत्तराखंड में छोटी वग्वाल 31 अक्टूबर गुरूवार १५ गते कार्तिक स०२०८१। बड़ी वग्वाल अर्थात मुख्य दीपावली 1 नवम्बर 2024। १६ गते कार्तिक शुक्रवार स० २०८१ को ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।।*

*इस प्रकार रहेगा दीप त्योहारों का क्रम*
दि० 29 अक्टूबर 2024 धनतेरस एवं यमदीप ।

30 अक्टूबर 2024हनुमान जयन्ति / नरक चतुर्दशी।

31 अक्टूबर 2024 छोटी दीपावली एवं निशीथ काल पूजन।

1 नवंबर 2024 बड़ी दीपावली अर्थात लक्ष्मी पूजन।

दि० 2 नवंबर 2024 गोवर्धन एवं बलिराज पूजा ।

दि 3 नवंबर 2024 भैयादूज ।।

 

 

देहरादून । प्रतियोगिताएं चाहे किसी भी क्षेत्र में हो उसमें जो भी विद्यार्थी प्रतिभाग करते हैं ,उनके अंदर आत्मविश्वास और आत्म सम्मान की भावना बलवती होती है, और इससे उनके जीवन का प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक विकास होता है।

 

उपरोक्त विचार सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा आचार्य डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने व्यक्त किए ,वह आज उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा आयोजित खंड स्तरीय छात्र प्रतियोगिताओं का कन्या गुरुकुल महाविद्यालय राजपुर रोड में *मुख्य अतिथि* के रूप में समापन कर रहे थे। सहायक निदेशक ने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में हार और जीत महत्वपूर्ण नहीं होती है ,बल्कि उसमें प्रतिभाग करना महत्वपूर्ण होता है, उससे जहां एक तरफ विद्यार्थियों की विभिन्न रुचियो का विकास होता है, तो दूसरी तरफ शिक्षकों के उनके प्रति व्यवहारिक ज्ञान का पता चलता है।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ आसाराम मैठाणी को पूरे देहरादून जनपद में रायपुर विकासखंड में सबसे सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए डॉक्टर घिल्डियाल ने खंड स्तर पर छह विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को नगद धनराशि एवं प्रशस्ति पत्र तथा उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को भी प्रशस्ति पत्र देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

*इससे पूर्व मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर शिक्षा विभाग की तरफ से प्रतियोगिताओं की मार्गदर्शक खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती हेमलता गौड़ एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ आसाराम मैठाणी तथा महाविद्यालय की प्राचार्य सुश्री संतोष विद्यालंकार ने मुख्य अतिथि सहायक निदेशक डॉक्टर चन्डी प्रसाद घिल्डियाल का पुष्पमाला एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य स्वागत करते हुए उन्हें शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा का चमकता हुआ सितारा बताया।*

 

प्रतियोगिताओं में कढ़ी प्रतिस्पर्धा में श्लोक उच्चारण में श्री गुरु राम राय संस्कृत महाविद्यालय के छात्र अनूप भट्ट ने प्रथम स्थान, शिवनाथ संस्कृत महाविद्यालय के छात्र विधानसभा से मल ने द्वितीय स्थान तथा द्रोण स्थली आर्ष आ कन्या गुरुकुल की अदिति ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।आशु भाषण में द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल की कुमारी अग्रिमा ने प्रथम स्थान, वाद विवाद प्रतियोगिता में द्रोणस्थली आरष कन्या गुरुकुल की छात्रा रितिका ने प्रथम स्थान, आर्ष कन्या गुरुकुल की कुमारी वान्या ने द्वितीय स्थान,समूह गान में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय देहरादून ने प्रथम स्थान, श्री गुरु राम राय संस्कृत महाविद्यालय देहरादून में द्वितीय स्थान तथा द्रोण स्थली आर्ष कन्या गुरुकुल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। संस्कृत सामूहिक नृत्य में कन्या गुरुकुल महाविद्यालय देहरादून ने प्रथम स्थान तथा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अजबपुर ने द्वितीय स्थान संस्कृत नाटक में द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय ने प्रथम स्थान और कन्या गुरुकुल महाविद्यालय देहरादून ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

 

इस अवसर पर निर्णायक मंडल सहित आयुर्वेद की प्रोफेसर डॉ बीना पुरोहित, आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर दीपशिखा, प्रवक्ता अंजू कॉमेडी, सरिता सयाना , राजकीय डिग्री कॉलेज सुद्धोवाला की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नीतू बलूनी, डॉ शैलेंद्र डंगवाल सहित रायपुर विकासखंड के प्रधानाचार्य, शिक्षक ,कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दतिया शहर के हनुमान गढ़ी मन्दिर में स्वामी श्री श्री 1008 चेतनदास महाराज जी के सानिध्य में आगामी सात नवम्बर को विशाल माँ बगलामुखी का यज्ञ आयोजित होगा यज्ञ को लेकर विशेष उत्साह है

यह जानकारी देते हुए सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने बताया कि उनकी 36 दिवसीय साधना के पश्चात यहाँ विराट यज्ञ का आयोजन होगा इस यज्ञ में उत्तराखण्ड राजस्थान उत्तर प्रदेश गुजरात सहित देश के तमाम भागों के भक्तजन भाग लेंगे

 

 

श्री पाण्डेय ने बताया मध्य प्रदेश में स्थित दतिया शहर का महत्व सम्पूर्ण भारत वर्ष की आध्यात्म की विरासत में अद्भूत व अतुलनीय है।ब्रहमास्त्र शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माई पीताम्बरा का दरवार स्थित होनें के कारण दतिया को पावन धाम का दर्जा प्राप्त है।महाभारत काल की स्मृतियों को अपनें आंचल में समेटे दतिया धाम में माई पीताम्बरा के दर्शनों हेतु देश व विदेश से भक्तजनों की आवाजाही निरंतर लगी रहती है इस दरवार के प्रति प्रवासी उत्तराखण्डवासियों की भी गहरी आस्था है देहरादून,हल्द्वानी, के अलावा दिल्ली,लखनऊ,मुंबई आदि महानगरों में प्रवास कर रहे पहाड़वासी समय समय पर दतिया पंहुचकर माई पीताम्बरी के दर्शन कर अपना जीवन धन्य करते है। उन्होंनें कहा भगवान श्री कृष्ण की आराध्या होनें के कारण ये केशवस्तुता भी कही जाती है अनेक प्राचीन वैदिक संहिताओं तथा धर्म ग्रन्थों में महाविद्या बगलामुखी देवी के स्वरूप, शक्ति व लीलाओं का अत्यन्त विषद वर्णन मिलता है। दश महाविद्याओं में भगवती बगलामुखी को पंचम शक्ति के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है। यथा भारतवर्ष के मध्य प्रदेश राज्य अन्तर्गत दतिया नगर में स्थित पीताम्बरा शक्ति पीठ, भगवती बगलामुखी देवी के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। इसकी नींव वर्ष 1920 में तत्कालीन महान सन्त पूज्यपाद राष्ट्रगुरु अनन्त श्री स्वामी जी महाराज द्वारा लोक कल्याण के पावन संकल्प के साथ रखी गयी थी। यहीं से बगलामुखी देवी की साधना एवं पूजा-अर्चना पीताम्बरा स्वरूप में आरम्भ हुई और देखते ही देखते इस शक्तिपीठ की कीर्ति पूरे भारतवर्ष में फैल गयी और वर्तमान में तो मॉ का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ दुनिया भर के समर्पित साधकों के लिए एक महातीर्थ के रूप में लोक प्रसिद्ध है दतिया स्थित भगवती पीताम्बरी माई के इस शक्तिपीठ का पुरातन स्वरूप बड़ा ही आकर्षक, मनोहारी एवं परम शान्तिदायक था। नैसर्गिक वातावरण के बीच स्थित यह शक्तिपीठ तब चारों ओर से सघन वनों से घिरा हुआ था। आश्रम से लगे वन क्षेत्र में दिन के समय में भी अनेक वन्य जीव यत्र-तत्र निर्भय होकर विचरते रहते थे। ऐसे भी प्रशंग मिलते हैं जब हिंसक वन्य जीव आश्रम परिसर में आ कर शान्त भाव से घंटों बैठे रहते थे और महाराज के सानिध्य में मानो भक्ति का लाभ उठाते थे। हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित आश्रम में नाना प्रकार के पक्षियों का मधुर कलरव यहां के दिव्य एवं मनोहारी वातावरण को और भी मोहक बना देता था। मन्द पवन के बीच रंग-विरंगे फूलों पर मंडराते भंवरों की गुंजन समूचे वातावरण में संगीत का अनुभव कराती प्रतीत होती थी। आश्रम में दूर-दूर से आकर सन्त-महात्मा एवं साधकगण नित्य ही शोभा पाते थे और पूज्यपाद अनन्त श्री महाराज जी के स्नेह,सानिध्य एवं मार्गदर्शन में मॉ भगवती पीताम्बरी देवी की कठोर व पवित्र साधना में रत रह कर अनेकानेक सिद्धियां अर्जित करते थे। सभी तरह की सिद्धियों में लोक कल्याण की पुनीत भावना सर्वोपरि रहती थी।आज भी शान्ति का यह स्वरुप यहां कायम है। महाभारत कालीन दंतवक्र के नाम के आधार पर दतिया का नाम जगत में प्रसिद्व हुआ दंतवक्र राजा शिशुपाल के परम मित्रों में एक थे। पीठ में स्थित वनखंडेश्वर मंदिर अश्वथामा की तपोस्थली के रुप में प्रसिद्व है कहा जाता है माई पीताम्बरी के दरवार में स्थित इस देव दरबार में झूठी कसम खाना महाअनर्थ का सूचक माना जाता है।दतिया देश के बुंदेलखंड प्रांत का एक शहर है। ग्वालियर से कुछ ही किमी० की दूरी पर यू०पी० की सीमा पर स्थित दतिया मध्य प्रदेश का लोकप्रिय तीर्थस्थलों में सबसे महत्वपूर्ण है।झांसी से यहां की दूरी पन्द्रह किलोमीटर है।इस मन्दिर के आसपास तीर्थ स्थलों की लम्बी श्रृखंला मौजूद है।यहां का किला भी अपनी पुरातन ऐतिहासिकता का प्रमाण देता है

इसी भूभाग में स्थित हनुमान गढ़ी का महत्व भी बड़ा ही निराला है इसी पावन धरा पर 7 नम्बम्बर को विशाल यज्ञ आयोजित होगा

“*विद्वान सर्वत्र पूज्यते*

 

 

 

*देहरादून ।स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते शास्त्रों की यह उक्ति सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा आचार्य डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल पर एकदम सटीक बैठती है, जिन्हें एक ही दिन देहरादून जनपद के दो विकास खंडों में पुरस्कार वितरण समारोह का मुख्य अतिथि बनाया गया है।*

 

बताते चलें कि द्वितीय राजभाषा संस्कृत के प्रचार एवं प्रसार के उद्देश्य से द्वितीय राजभाषा कार्यक्रम क्रियान्वयन के तहत उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा राज्य के विचार 95 विकासखंडों में 15 एवं 16 अक्टूबर को संस्कृत छात्र प्रतियोगिताएं शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित की जा रही है। यह प्रतियोगिताएं खेल की तरह नहीं है बल्कि नाटक, श्लोकउच्चारण, सामूहिकनृत्य, सामूहिक गायन, वाद विवाद एवं आशु भाषण में यह प्रतियोगिताएं राज्य के सभी शासकीय एवं अशासकीय हिंदी,संस्कृत एवं अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों द्वारा कक्षा 6 से एम ए ,आचार्य तक के विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष आयोजित की जाती हैं।

इन प्रतियोगिताओं की खासियत है, कि इनमें सबसे अधिक नगद पुरस्कार धनराशि विजेता प्रतिभागियों को मौके पर ही प्रदान की जाती है, देहरादून जनपद के छह विकासखंडों में भी यह प्रतियोगिता खंड शिक्षा अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजित हो रही है, मार्गदर्शक खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा भेजे गए आमंत्रण पत्रों के अनुसार दो विकासखंडों रायपुर एवं डोईवाला में सहायक निदेशक डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल मुख्य अतिथि के रूप में पुरस्कार वितरण कर समापन करेंगे।

*स्मरणीय है, कि डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल को कुशल प्रशासक के साथ विद्वान अधिकारी के रूप में जाना जाता है, और उनके विचारों को सुनने के लिए शिक्षा जगत में बड़ी उत्सुकता रहती है, पूरे राज्य से उन्हें कार्यक्रमों में बुलाने के लिए विद्यालयों में एक किस्म से पूरे वर्ष भर होड़ रहती है।*

 

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को रात्रि 9 बजकर 07 मिनट पर बंद होंगे।

 

परंपरानुसार श्री केदारनाथ धाम एवं श्री यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज के दिन बंद होते है।

 

श्री गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट गोवर्धन पूजा के दिन बंद होते है।

 

• द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट 20 नवंबर

तथा तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट 4 नवंबर को बंद होंगे । आज तय हुई कपाट बंद होने की तिथि

 

श्री बदरीनाथ / केदारनाथ धाम/ देहरादून : 12 अक्टूबर। इस यात्रा वर्ष विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार 17 नवंबर

नवंबर रात्रि 9 बजकर 07 मिनट पर मिथुन लग्न में शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे।

तथा पंच पूजायें बुधवार 13 नवंबर से शुरू होंगी इसी के साथ उत्तराखंड चार धाम के कपाट बंद होने की तिथियां घोषित कर दी गयी है।

 

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि आज विजय दशमी/ दशहरे के अवसर पर श्री बदरीनाथ धाम मंदिर परिसर में पंचाग गणना पश्चात समारोहपूर्वक तय की गयी। कपाट बंद होने की तिथि तय करने हेतु दोपहर साढ़े ग्यारह बजे से कार्यक्रम शुरू हो गया था।

समारोह में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु एवं तीर्थयात्री भी मौजूद रहे‌।

 

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के कार्यक्रम विजय दशमी के अवसर पर श्री बदरीनाथ -केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने अपने संदेश में तीर्थयात्रियों को शुभकामनाएं दी है। यात्रा से जुड़े सभी विभागों,संस्थाओं, संगठनों सभी का आभार जताया।

कहा कि इस यात्रा वर्ष श्री बदरीनाथ -केदारनाथ यात्रा सरल सुगम रही अभी यात्रातथा यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे। सरकार एवं मंदिर समिति के प्रयासों से सभी यात्री सुविधाएं मुहैया हुई है।

 

बदरीनाथ धाम से मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया है कि अभी तक 11 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे है तथा साढे 13 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री केदारनाथ धाम दर्शन को पहुंचे।

इस तरह साढ़े 24 लाख तीर्थयात्रियों ने श्री बदरीनाथ -केदारनाथ के दर्शन कर लिए है एवं साढ़े अड़तीस लाख तीर्थयात्री चारधाम यात्रा पर पहुंच गये है।

 

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के कार्यक्रम विजय दशमी के अवसर पर रावल अमरनाथ नंबूदरी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार एवं सदस्यगण, मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल,प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी एवं बामणी, पांडुकेश्वर एवं माणा के हक-हकूकधारियों एवं तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट पंचांग गणना के अनुसार कपाट बंद होने की तिथि तय की।

 

 

तथा आज ही देव डोलियों के योग बदरी पांडुकेश्वर तथा श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ प्रस्थान का कार्यक्रम भी तय हुआ। साथ ही यात्रा वर्ष 2025 के लिए भंडार व्यवस्था हेतु सम्मान स्वरूप पगड़ी भेंट की गयी।

भंडारी तोक से कुंदन सिंह भंडारी,कमदी थोक से अनुपम पंवार,मेहता थोक से यशवंत मेहता एवं सोबित मेहता को पगड़ी भेंट की गयी।

 

 

कपाट बंद होने से पहले होने वाली पंच पूजाओं के अंतर्गत

सोमवार 13 नवंबर को पहले दिन श्री गणेश जी की पूजा तथा शायं को गणेश जी के कपाट बंद होंगे। 14 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होंगे, 15 नवंबर को खड़क पुस्तक वाचन तथा वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जायेगा, शनिवार 16 नवंबर को माता लक्ष्मी जी को कढ़ाई भोग लगाया जायेगा।

 

तथा 17 नवंबर शाम सात बजे बाद कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। रावल जी स्त्री रूप धारण कर माता लक्ष्मी को परिसर स्थित मंदिर से श्री बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान करेंगे।

इससे पहले श्री उद्धव‌ जी एवं कुबेर जी मंदिर गर्भगृह से बाहर परिसर में आयेंगे। इसी के साथ रात्रि 9 बजकर 07 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे।

इसी दिन साथ ही श्री कुबेर जी रात्रि प्रवास हेतु बामणी गांव प्रवास हेतु पहुंचेंगे तथा श्री उद्धव जी रावल निवास आ जायेंगे

 

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा हरीश गौड़ ने बताया कि देव डोलियों के शीतकालीन पूजा स्थल प्रस्थान के तहत सोमवार 18 नवंबर को श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी सहित रावल अमरनाथ नंबूदरी तथा आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी रात्रि प्रवास हेतु योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेंगे।

श्री उद्धव जी एवं श्री कुबेर जी शीतकाल में पांडुकेश्वर प्रवास करेंगे जबकि आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी 19 नवंबर मंगलवार को श्री नृसिंह मंदिर परिसर में विराजमान हो जायेगी।

इस तरह इस वर्ष की श्री बदरीनाथ धाम यात्रा का भी समापन हो जायेगा।

 

आज ही श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर में नौ दिन से चल रही मां दुर्गा पूजा एवं माता उर्वशी पूजन का भी आज हवल यज्ञ के साथ समापन हो गया है‌।उसके बाद कपाट बंद होने की तिथि निर्धारित का कार्यक्रम शुरू हुआ।

आज कपाट बंद होने की तिथि निर्धारित होने के अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, सदस्य भास्कर डिमरी,मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी,ईओ नगर पंचायत सुनील पुरोहित, थाना प्रभारी नवनीत भंडारी,प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट, डिमरी पंचायत पूर्व अध्यक्ष विनोद डिमरी,जेई गिरीश रावत, राजेंद्र सेमवाल, जगमोहन बर्त्वाल, संतोष तिवारी, लेखाकार भूपेंद्र रावत, संदेश मेहता, विश्वनाथ,केदार सिंह रावत, स़जय तिवारी अजय सती अनसूया नौटियाल, अजीत भंडारी, संजय थपलियाल योगंबर नेगी, वैभव उनियाल, सत्येन्द्र चौहान,विकास सनवाल, दिनेश भट्ट,हरीश जोशी आदि मौजूद रहे।

 

परंपरागत रूप से श्री केदारनाथ धाम के कपाट दीपावली के पावन पर्व के पश्चात भैया दूज को बंद हो जाते है। इस बार श्री केदारनाथ धाम के कपाट 3 नवंबर भैयादूज को सुबह 8.30 बजे बंद हो रहे है। इसी दिन 3 नवंबर को भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली पहले पड़ाव रामपुर ( निकट फाटा) को प्रस्थान करेगी।

 

4 नवंबर को पंचमुखी डोली श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी 5 नवंबर को गुप्तकाशी से पंचकेदार गद्दस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में शीतकाल हेतु विराजमान होगी।

 

 

यह भी उल्लेखनीय है कि इसी दिन यमुनोत्री धाम के कपाट भी बंद होते है तथा भैया दूज से एक दिन पहले अन्नकूट गोवर्धन पूजा के दिन श्री गंगोत्री धाम के कपाट अभिजीत मुहूर्त में बंद होते है इस यात्रा वर्ष भैयादूज रविवार 3 नवंबर को यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर 12 बजकर 3 मिनट पर बंद हो रहे है तथा अन्नकूट गोवर्धन पूजा शनिवार 2 नवंबर को है इस दिन गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12 बजकर 4 मिनट पर शुभ मुहूर्त में बंद हो रहे है।

 

 

श्री गंगोत्री तथा यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि तथा समय की घोषणा श्री गंगोत्री मंदिर समिति तथा यमुनोत्री मंदिर समिति द्वारा पृथक-पृथक रूप से की गयी है वहीं प्रसिद्ध गुरुद्वारा हेमकुंट साहिब तथा लोकपाल तीर्थ लक्ष्मण मंदिर के कपाट बीते बृहस्पतिवार 10 अक्टूबर को बंद हो गये है।

 

 

वही द्वितीय केदार मद्महेश्वर जी के कपाट 20 नवंबर को बंद हो रहे है तथा तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट 4 नवंबर को बंद हो रहे है। जबकि मद्महेश्वर मेला 23 नवंबर को है इसी दिन श्री मद्महेश्वर भगवान की चल विग्रह डोली विभिन्न पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेंगे जबकि श्री तुंगनाथ जी की चलविग्रह उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होकर 7 नवंबर को मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ पहुंचेगी।

प्रेस विज्ञप्ति

सादर प्रकाशनार्थ

 

 

वाराणसी 4.10.24

परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती 1008 ने काशी के सनातनी मन्दिरों से चांद मियां की प्रतिमा को हटाने को शास्त्रसम्मत व सराहनीय कार्य बताया है। साथ ही सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा की गिरफ्तारी पर रोष व्यक्त किया है।

ज्ञातव्य है कि इस समय काशी के परम्परागत सनातनी मन्दिरों से इस समय चांद मियां साईं के विग्रह को हटाया जा रहा है। इस सुकृत्य का स्वागत करते हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सनातनी मन्दिरों में पुजारियों व प्रबन्धकों की नासमझी, लापरवाही व शिथिलता से लोभ, भय अथवा अन्यान्य कारणों से ऐसी मूर्तियाँ स्थापित कर दी गईं जिनका सनातन धर्मशास्त्रों में न तो उल्लेख है, न तो कोई उनकी पूजा की विधि है और न ही सनातनधर्मियों को उनसे किसी भी प्रकार की प्रेरणा मिलती है।

कहा कि इस तरह के सनातन धर्म विरोधी कार्य से अपने सनातन धर्म के मन्दिरों को मुक्त कराने के लिए, परिसर में पुनः पवित्र वातावरण बनाने के लिए जागरुकता कुछ लोगों में आई। विशेष करके तब जब ये पता चला कि तिरुपति बालाजी जी मन्दिर से जो प्रसाद बांटा जा रहा था व लोगों को खरीदने पर मिल रहा था उसमें बहुत बड़ी मात्रा में बहुत लम्बे समय तक अखाद्य पदार्थ मिलाए जा रहे थे। ऐसे में शुद्धि के प्रति लोगों में मन मे भावना जागृत हुई। तब उन्होंने सोचा कि हमारे सनातनी मन्दिरों के परिसर में ये जो अशुद्धियों आ गई हैं इनको भी दूर किया जाना चाहिए और इसके लिए कुछ लोग खड़े हुए। ब्राह्मण सभा, सनातन धर्म रक्षक दल व अन्य ऐसी ही कई संस्थाओं के नाम हमको बताये गये और उन लोगों ने साईं की प्रतिमा सनातनी मन्दिरों से हटाने का सराहनीय कार्य किया।

उन लोगों ने कुछ मन्दिरों के लोगों से बात की और वहाँ के लोग भी तैयार हुए। तब बनी सहमति के आधार पर ऐसे जो प्रदूषक तत्व थे, मूर्ति थी उनको हटा दिया गया। ये काशी में एक अच्छा कार्य हो रहा था। हमको भी लोगों ने बताया था तो हमने कहा कि ये अच्छा कार्य है, अभिनन्दनीय है। ऐसे में अब पता चला है कि ऐसा उत्तम सनातनधर्मानुरूप जो कार्य था, मन्दिरों के परिष्कार का कार्य था, अशुद्धि को दूर करने का कार्य था उस कार्य में लगे लोगों में से एक पं अजय शर्मा जी को पुलिस ने किन्ही लोगों की शिकायत पर शान्ति भङ्ग की आशङ्का में गिरफ्तार कर लिया है और दूसरी अनेक धाराएं भी लगाई हैं।

वाराणसी प्रशासन के द्वारा ऐसा कार्य किया गया है। हम यही नही समझ पाते हैं कि अगर हम अपने मन्दिरों में कोई शुद्धि कर रहे हैं, परिष्कार कर रहे हैं तो उसमें लोगों को क्या आपत्ति हो सकती है? जो लोग ये कार्य कर रहे थे उन्होंने स्पष्टता के साथ कहा है कि अगर कोई किसी का भक्त है तो वो उनका अलग मन्दिर बनाए उसमें उसकी पूजा करे। हालांकि मन्दिर तो सनातनी देवताओं का होता है। लेकिन फिर भी इतने तक तैयार हैं कह रहे हैं अलग मन्दिर बना लें और अपने स्वयं पूजा करें तो जब इतनी बात कही जा रही है अपमान किसी का किया नही जा रहा है। कोई मूर्ति तोड़कर फेंकी नही जा रहा है।जब वहाँ से हटाया जा रहा तब उसे ढंक कर आदरपूर्वक हटाया जा रहा है ताकि किसी की भावना को ठेस न लगे। ये भी मीडिया में बात आई है कि उनको गङ्गा में प्रवाहित किया गया। गङ्गा में प्रवाहित करने का मतलब यह ही कि इस बात का ध्यान रखा गया कि कहीं कूड़े-कचरे में न फेंका जाए ताकि लोगों की भावना आहत न हो।

जब हम अपने सनातनधर्म का मन्दिर परिष्कृत कर रहे हैं और उसमें आए हुए अपशिष्ट को (हम तो यही कहेंगे) सम्मान के साथ विदा कर रहे हैं।उसके बाद भी कोई कह रहा है कि अशान्ति हो रही है तो यह बड़ा आश्चर्य है। जिस काशी में जाने कितने मन्दिरों को तोड़ करके वहाॅ पर लोग चढ़े बैठे हुए हैं उससे अशान्ति नहीं हो रही है और जब हम अपने मन्दिर का परिष्कार कर रहे हैं तो उससे अशान्ति हो जाएगी।

आगे कहा कि जब हम अपने पूज्यपाद गुरुदेव की आज्ञा से जो काशी में शिवलिंग प्रकट होने पर उसकी पूजा करने जा रहे थे तो हमको वहाँ के प्रशासन ने रोक दिया कि अशान्ति होगी। दुबारा हम परम्परा के अनुसार जब उस परिसर की परिक्रमा करने जा रहे थे तब भी हमें रोक दिया गया क्योंकि अशान्ति हो रही थी तो हम पूछना चाहते हैं कि क्या हिन्दू कुछ भी अपने धर्म के लिए करे उसमें अशान्ति हो जाती है और बाकी लोग जो चाहे करें उसमे कोई अशान्ति समाज में नहीं होती है? ये जो परिभाषा निकलकर धीरे-धीरे सामने आ रही है ये समझ से बाहर है। इसमें अपने को विचार करना पड़ेगा और हिन्दुओं को भी तत्पर होना पड़ेगा। आखिर ये क्या है और प्रशासन को केवल अशान्ति हिन्दुओं से है?

अभी सबसे पहले तो आवश्यक है कि एक व्यक्ति जो सनातन धर्म का ही अंग है, एक संस्था जो हमारे सनातन धर्म का ही अंग है और उस व्यक्ति संस्था द्वारा वो कार्य किया जा रहा था जो सचमुच सनातनधर्मियों द्वारा कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन उसको करने वाले को धारा लगाकर पुलिस गिरफ्तार करके ले जाती है तो हमारा ये कर्तव्य बन जाता है कि हम उस व्यक्ति उस संस्था के साथ खड़े हों एक सनातनधर्मी होने के नाते और इसीलिए हम उस संस्था व व्यक्ति के साथ खड़े हैं।हम ये नही कह रहे हैं कि अशान्ति मचाई जाए हम ये भी नहीं कह रहे हैं कि कोई उपद्रव किया जाए।लेकिन ये जरूर कह रहे हैं कि इस समय हम सनातनधर्मियों को खड़े होकर अजय शर्मा जी के लिए जो कानूनी मदद हो वो करनी चाहिए। अच्छे से अच्छे वकील खड़ा करना चाहिए ताकि अजय शर्मा जी पुलिस के बन्धन से मुक्त हो सकें। बिना कारण उनको जेल न भेजा जाए, उनका जमानत करा किया जाए और उनका मुकदमा हम लोग कानून की परिधि में रहकर दृढ़ता से लड़ेंगे।

उक्त जानकारी देते हुए परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि इस समय पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने व गोकशी बन्द कराने हेतु 36 राज्यों के राजधानी में गौध्वज स्थापित करने हेतु सम्पूर्ण राष्ट्र में भ्रमण कर रहे हैं।पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज के कठिन तप व अथक प्रयास के परिणामस्वरूप गौमाता महाराष्ट्र में राज्य माता घोषित हो चुकी हैं।

महाराजश्री को भारत भ्रमण के दौरान जब ज्ञात हुआ कि काशी में साई की प्रतिमा हटाई जा रही है और उस सुकृत्य को सम्पादित करने वाले पं अजय शर्मा को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है तो उन्होंने ऑडियो रिकार्डिंग के माध्यम से अपना सन्देश सम्प्रेषित किया हैं।

परमधर्माधीश शङ्कराचार्य जी महाराज ने अनेकों बार दृढ़ता से कहा है कि सनातनधर्म शास्त्रानुसार चलता है।शास्त्र में जिसका उल्लेख नहीं वो अपूज्य है और हम सनातनधर्मियों के मन्दिरों में अपूज्य की पूजा कदापि नहीं हो सकती है। साईं बाबा एक मुस्लिम फकीर थे उनको हमारे मन्दिरों में प्रतिष्ठित करना अपराध है। फिर भी अगर किसी को साईं बाबा की पूजा करनी है तो उनका अलग मन्दिर बना लें हमें कोई आपत्ति नही है।लेकिन चांद मियां साईं को हमारे शिवलिंग पर बैठा दिखाना, साईं के हाथ मे सुदर्शन चक्र थमाना,भगवान के विराट स्वरूप के मध्य साईं का चित्र बनाना, ॐ नमः शिवाय की जगह ॐ साईं नमः कहना, सीताराम की जगह साईं राम कहना, साईं चालीसा और साईं गायत्री बनाना कत्तई स्वीकार नही है।हमारे ब्रह्मलीन गुरुदेव ने पहले ही न्यायालय और हर जगह प्रमाण प्रस्तुत करवा दिया है और धर्मनिर्णय भी दिया है। अब बस क्रियान्वयन बाकी है।

प्रेषक
संजय पाण्डेय-मीडिया प्रभारी।
परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज