वाराणसी,8.11.24

 

कल शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में मध्याह्न 12 बजे से 2 बजे तक परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरनन्द: सरस्वती 1008 जी महाराज के पावन सानिध्य में गौप्रतिष्ठा सभा का आयोजन किया जाएगा।जिसमें सभी प्रदेशों के गौप्रतिनिधि,सन्त व भक्त उपस्थित रहेंगे।गौप्रतिष्ठा सभा के पश्चात परमधर्माधीश शंकराचार्य जी महाराज गौध्वज दिखाकर सभी प्रदेशों के लिए गौप्रतिनिधियों को रवाना करेंगे।

 

उक्त जानकारी देते हुए परमधर्माधीश शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि सभी गौप्रतिनिधि अपने अपने प्रदेश में गोप्रतिष्ठा सभा कर गोप्रतिष्ठाध्वज लगाएंगे।और गौमाता को राज्यमाता घोषित कराने हेतु माहौल बनाएंगे।साथ ही जन जन को पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज के गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा आंदोलन से जोड़ेंगे।

 

कल के कार्यक्रम में प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक चैनल के सभी सम्मानित पत्रकार बन्धु सादर आमंत्रित हैं।

 

प्रेषक

संजय पाण्डेय-मीडिया प्रभारी।

परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य जी महाराज।

 

 

सामान्य धर्म सभी के लिए पालनीय है। ये सभी स्मृतियों में उल्लिखित हैं जो कुल मिलाकर 37 धर्म होते हैं। इनका पालन सभी को करना चाहिए।

 

उक्त उद्गार परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती 1008 ने मार्दव धर्म एवं रक्षा धर्म नाम के पुस्तक के अवसर पर श्रीविद्यामठ में आयोजित सायंकालीन सभा में कही।

 

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य इन सभी धर्मों को अपने जीवन में उतारेगा तो अवश्य ही यह लाभकारी होगा।

 

इस अवसर पर डा रंजन शर्मा जी ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

 

कार्यक्रम का संचालन साध्वी पूर्णाम्बा दीदी जी किया।

 

 

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सर्वश्री:-मुकुंदानंद ब्रम्ह्चारी, परमात्मानंद ब्रम्हचारी,संजय पाण्डेय मीडिया प्रभारी,डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल,कमला कांत त्रिपाठी,गिरीश दत्त पाण्डेय,डॉ साकेत शुक्ला,विनोद शुक्ला,रवि त्रिवेदी,कीर्ति हजारी शुक्ला,सौरभ हजारी शुक्ला,विकल्प शुक्ला,आदि जन उपस्थित रहे।

 

प्रेषक

संजय पाण्डेय-मीडिया प्रभारी।

परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य जी महाराज।

प्रेस विज्ञप्ति

प्रकाशनार्थ

 

 

 

36 दिन में 36 राज्यों में गौध्वज प्रतिष्ठित कर काशी पधारे परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज का काशी में रहने वाले 36 राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने अपने पारंपरिक परिधान,राजकीय चिन्ह व गौध्वज के साथ अद्भुत स्वागत व अभिनंदन किया।

 

*काशी पधारे शंकराचार्य,पालकी पर निकली सवारी,जयघोष के साथ हुई पुष्पवर्षा व आतिशबाजी मातृशक्ति ने शंकराचार्य जी को लगाया 56 भोग उतारी आरती*

 

36 दिन में 36 राज्यों में गौध्वज प्रतिष्ठित कर,महाराष्ट्र में गौमाता को राज्यमाता घोषित करवाकर,भदोही स्थित अजोराधाम मंदिर में जगदगुरुगुरुकुलम की एक नई शाखा का उद्घाटन कर कल देर रात काशी पहुचने पर परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज का भारी संख्या में उपस्थित सन्तों,भक्तों व काशीवासियों ने जोरदार ढंग से पुष्पवर्षा,आतिशबाजी के साथ जयघोष करते हुए शंकराचार्य जी को पालकी में आरूढ़ कराकर क्षेत्र में सवारी निकाली।शंकराचार्य जी के निकली सवारी के दौरान क्षेत्रवासी प्रफुल्लित होकर अभिनंदन व वंदन कर रहे थे।

उक्त जानकारी देते हुए परमधर्माधीश शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी सजंय पाण्डेय जी ने बताया कि परमधर्माधीश शंकराचार्य जी महाराज के आगमन से सन्तों भक्तों में असीम ऊर्जा की लहर दौड़ गई।श्रीविद्यामठ को फूलों व हजारों दीपक से सजाया गया था।श्रीविद्यामठ पहुचने पर सर्वप्रथम संतोष चौबे व चांदनी चौबे ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य शंकराचार्य जी महाराज के चरणपादुका का पूजन किया।श्रीविद्यामठ में उपस्थित देश विदेश से आए भक्तों ने शंकराचार्य जी महाराज को 56 भोग समर्पित कर सामूहिक रूप से आरती उतारी।कल भक्तों ने शंकराचार्य जी महाराज के आगमन पर पुनः दीपावली मनाई।

 

*शङ्कराचार्य बिरुदावली गीत का हुआ लोकार्पण*

 

साध्वी पूर्णाम्बा जी द्वारा रचित गीत जगद्गुरु बिरुदावली गान का लोकार्पण आज श्रीविद्यामठ में ज्योतिर्मठ के शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज के कर-कमलों से हुआ।साध्वी पूर्णाम्बा जी ने कहा कि शङ्कराचार्य जी के प्रवचन के पूर्व संस्कृत भाषा में बोली जाने वाली बिरुदावली का यह संस्कृत से हिन्दी काव्यानुवाद है जो ज्योतिर्मठ के 55वें वर्तमान जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज के श्रीचरणों में समर्पित हो रहा है।इसकी रचना साध्वी पूर्णाम्बा जी ने की केरल के श्री सुशील जी ने इसे स्वर दिया है और इसका प्रकाशन ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय की ओर से हुआ है जिसको रिकार्डिंग कर प्रस्तुति श्री विश्वनाथ जी ने किया है।।

 

समस्त कार्यक्रम के दौरान सर्वश्री- गौसांसद साध्वी पूर्णाम्बा दीदी,शारदाम्बा दीदी,ब्रम्ह्चारी मुकुंदानंद,ब्रम्ह्चारी परमात्मानंद,संजय पाण्डेय,मीडिया प्रभारी,राजेन्द्र तिवारी विश्वनाथ मंदिर महंत,राजनाथ तिवारी विशालाक्षी मन्दिर महन्त,डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल,सत्तन पाण्डेय,अनिल पाण्डेय,रवि त्रिवेदी,कीर्ति हजारी शुक्ला,यतीन्द्र चतुर्वेदी,राकेश पाण्डेय,सदानंद तिवारी,अभय शंकर तिवारी,अनुराग दुबे,अजित मिश्रा,आशीष गुप्ता,अमित तिवारी,सावित्री पाण्डेय,लता पाण्डेय,विजया तिवारी सहित भारी संख्या में सन्त व भक्त उपस्थित थे।

राजस्थान (केकड़ी)

दिनांक 30/10/2024,

छोटी दीपावली के अवसर पर केकड़ी जिले की झुग्गी बस्तियों में छोटे बच्चो, महिलाओ, और पुरुषो को वस्त्र वितरित किए गए। सामाजिक सरोकार के तहत केकड़ी जिले के समाजसेवी प्रबोधक  धर्मचंद आचार्य एवम  ऋषि राज सोनी ने जरूरतमंद परिवारों को वस्त्र वितरित किए। बच्चो ने उनके पसंद के वस्त्र पाकर खुशी महसूस की। महिलाओ और पुरुषो को उनके पसंद के वस्त्र मिलने पर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। श्री आचार्य ने बच्चो को शर्ट, पेंट,महिलाओं को साड़ी, चुनरी, सलवार सूट और पुरुषो को शर्ट और पेंट वितरित किए गए। ज्ञात हो कि श्री आचार्य लगभग दस वर्षो से जरूरतमंद परिवारों को अनेक सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर लोगो की सेवाएं कर रहे हैं केकड़ी जिले के निवासी श्री धर्मचंद आचार्य वर्तमान में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय फलोदी पंचायत समिति गंगरार जिला चित्तौड़गढ़ राजस्थान में प्रबोधक लेवल 2हिंदी के पद पर कार्यरत हैं। देश व विदेश के अनेक सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर केकड़ी, अजमेर, शाहपुरा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ में अपनी सेवाए दे रहे हैं और जरूरतमंद लोगों की सेवाएं कर रहे हैं।।

 

 

 

नई दिल्ली : भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपना नया लोगो(Logo) और स्लोगन लॉन्च कर दिया है. नया लोगो (Logo) भारत के हर कोने में सुरक्षित, किफ़ायती और विश्वसनीय कनेक्टिविटी प्रदान करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है. स्लोगन “कनेक्टिंग इंडिया” की जगह “कनेक्टिंग भारत” कर दिया गया है. लोगो को संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासनी चंद्रशेखर की मौजूदगी में केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने लॉन्च किया।

 

नए लोगो के साथ-साथ, बीएसएनएल ने भारत में कनेक्टिविटी, संचार और डिजिटल सुरक्षा में क्रांति लाने के उद्देश्य से सात अग्रणी पहलों की घोषणा की. ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि, यह लॉन्च सेवा प्रदाता के लिए एक परिवर्तनकारी युग की शुरुआत है, जो सभी को निर्बाध, सार्वभौमिक, किफ़ायती और सुलभ कनेक्टिविटी प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि बीएसएनएल की अपनी तरह की पहली सेवाओं की श्रृंखला सुरक्षित, किफ़ायती और विश्वसनीय दूरसंचार नेटवर्क प्रदान करने में एक गेम चेंजर साबित होगी।

 

भारत के पहले 5G कैप्टिव नेटवर्क से लेकर एक मजबूत इंट्रानेट फाइबर लाइव टीवी तक, यह नया “अवतार” बीएसएनएल को भारत में दूरसंचार नवाचार के मामले में सबसे आगे रखेगा, जो गर्व से कहेगा कि यह सब “मेड इन इंडिया, मेड फॉर इंडिया और मेड बाय इंडिया” है.लोगो के अलावा, बीएसएनएल ने सात नई पहल शुरू की हैं: स्पैम-फ्री नेटवर्क, नेशनल वाई-फाई रोमिंग, आईएफटीवी, एनी टाइम सिम (एटीएस) कियोस्क, डायरेक्ट-टू-डिवाइस सर्विस, पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ, और फर्स्ट प्राइवेट 5जी इन माइंस, सभी को ग्राहकों के लिए एक सहज और सुरक्षित नेटवर्क प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

 

बीएसएनएल ने आज अपना स्पैम-फ्री नेटवर्क लॉन्च किया, जिसके बारे में कंपनी का दावा है कि यह फ़िशिंग प्रयासों और दुर्भावनापूर्ण एसएमएस को स्वचालित रूप से फ़िल्टर करेगा, जिससे अलर्ट जारी किए बिना उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित संचार वातावरण तैयार होगा. यह सभी के लिए सहज और सुरक्षित संचार सुनिश्चित करता है।

 

इसके अतिरिक्त, बीएसएनएल ने अपने एफटीटीएच ग्राहकों के लिए अपनी तरह की पहली निर्बाध वाई-फाई रोमिंग सेवा शुरू की, जिससे बीएसएनएल हॉटस्पॉट पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के हाई-स्पीड इंटरनेट एक्सेस संभव हो गया, जिससे यूजर्स के लिए डेटा लागत कम हो गई. बीएसएनएल ने भारत की पहली फाइबर-आधारित इंट्रानेट टीवी सेवा आईएफटीवी भी लॉन्च की, जो अपने एफटीटीएच नेटवर्क के माध्यम से 500 से अधिक लाइव चैनल और पे टीवी पेश करती है. यह सेवा सभी बीएसएनएल एफटीटीएच ग्राहकों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होगी, और टीवी देखने के लिए इस्तेमाल किया गया डेटा एफटीटीएच डेटा पैक में नहीं गिना जाएगा।

 

एनी टाइम सिम (एटीएस) कियोस्क के साथ, बीएसएनएल उपयोगकर्ताओं को 24/7 आधार पर सिम खरीदने, अपग्रेड करने, पोर्ट करने या बदलने की अनुमति देगा, जिससे निर्बाध केवाईसी एकीकरण और बहुभाषी पहुंच के साथ यूपीआई/क्यूआर-सक्षम भुगतान का लाभ उठाया जा सकेगा।

 

बीएसएनएल का पहला डायरेक्ट-टू-डिवाइस (डी2डी) कनेक्टिविटी समाधान उपग्रह और स्थलीय मोबाइल नेटवर्क को एकीकृत करता है ताकि निर्बाध, विश्वसनीय कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके। यह अभूतपूर्व तकनीक विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों और अलग-थलग क्षेत्रों में उपयोगी है, जिससे ऐसे क्षेत्रों में यूपीआई भुगतान संभव हो पाता है।

 

सरकारी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी की ‘सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा राहत’ पहल आपदा प्रतिक्रिया के लिए एक सुरक्षित नेटवर्क प्रदान करती है, जो संकट के दौरान सरकार और राहत एजेंसियों के लिए भारत का पहला गारंटीकृत एन्क्रिप्टेड संचार प्रदान करती है, जिससे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन क्षमताओं में वृद्धि होती है। मजबूत नेटवर्क डिजाइन निर्बाध कनेक्टिविटी की गारंटी देता है और आपदाओं के दौरान कवरेज बढ़ाने के लिए अभिनव ड्रोन-आधारित और बैलून-आधारित सिस्टम को शामिल करता है।

 

इसके अलावा, बीएसएनएल सी-डैक के साथ साझेदारी में खनन कार्यों के लिए विश्वसनीय, कम विलंबता वाली 5G कनेक्टिविटी शुरू कर रहा है, जिसमें मेड-इन-इंडिया उपकरण और बीएसएनएल की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा रहा है. यह सेवा भूमिगत खदानों और बड़े ओपनकास्ट संचालन में उन्नत एआई और आईओटी अनुप्रयोगों को सक्षम करेगी, जिसमें सुरक्षा विश्लेषण, एजीवी के वास्तविक समय के रिमोट कंट्रोल, एआर-सक्षम रिमोट रखरखाव, बेड़े की ट्रैकिंग और अनुकूलन के लिए उच्च गति, कम विलंबता कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है।

 

ये लॉन्च भारत के दूरसंचार परिदृश्य को बदलने के लिए बीएसएनएल की निरंतर प्रतिबद्धता का संकेत देते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि सुरक्षित, सस्ती और विश्वसनीय कनेक्टिविटी सभी के लिए सुलभ बनी रहे।

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दतिया शहर के हनुमान गढ़ी मन्दिर में स्वामी श्री श्री 1008 चेतनदास महाराज जी के सानिध्य में आगामी सात नवम्बर को विशाल माँ बगलामुखी का यज्ञ आयोजित होगा यज्ञ को लेकर विशेष उत्साह है

यह जानकारी देते हुए सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने बताया कि उनकी 36 दिवसीय साधना के पश्चात यहाँ विराट यज्ञ का आयोजन होगा इस यज्ञ में उत्तराखण्ड राजस्थान उत्तर प्रदेश गुजरात सहित देश के तमाम भागों के भक्तजन भाग लेंगे

 

 

श्री पाण्डेय ने बताया मध्य प्रदेश में स्थित दतिया शहर का महत्व सम्पूर्ण भारत वर्ष की आध्यात्म की विरासत में अद्भूत व अतुलनीय है।ब्रहमास्त्र शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माई पीताम्बरा का दरवार स्थित होनें के कारण दतिया को पावन धाम का दर्जा प्राप्त है।महाभारत काल की स्मृतियों को अपनें आंचल में समेटे दतिया धाम में माई पीताम्बरा के दर्शनों हेतु देश व विदेश से भक्तजनों की आवाजाही निरंतर लगी रहती है इस दरवार के प्रति प्रवासी उत्तराखण्डवासियों की भी गहरी आस्था है देहरादून,हल्द्वानी, के अलावा दिल्ली,लखनऊ,मुंबई आदि महानगरों में प्रवास कर रहे पहाड़वासी समय समय पर दतिया पंहुचकर माई पीताम्बरी के दर्शन कर अपना जीवन धन्य करते है। उन्होंनें कहा भगवान श्री कृष्ण की आराध्या होनें के कारण ये केशवस्तुता भी कही जाती है अनेक प्राचीन वैदिक संहिताओं तथा धर्म ग्रन्थों में महाविद्या बगलामुखी देवी के स्वरूप, शक्ति व लीलाओं का अत्यन्त विषद वर्णन मिलता है। दश महाविद्याओं में भगवती बगलामुखी को पंचम शक्ति के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है। यथा भारतवर्ष के मध्य प्रदेश राज्य अन्तर्गत दतिया नगर में स्थित पीताम्बरा शक्ति पीठ, भगवती बगलामुखी देवी के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। इसकी नींव वर्ष 1920 में तत्कालीन महान सन्त पूज्यपाद राष्ट्रगुरु अनन्त श्री स्वामी जी महाराज द्वारा लोक कल्याण के पावन संकल्प के साथ रखी गयी थी। यहीं से बगलामुखी देवी की साधना एवं पूजा-अर्चना पीताम्बरा स्वरूप में आरम्भ हुई और देखते ही देखते इस शक्तिपीठ की कीर्ति पूरे भारतवर्ष में फैल गयी और वर्तमान में तो मॉ का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ दुनिया भर के समर्पित साधकों के लिए एक महातीर्थ के रूप में लोक प्रसिद्ध है दतिया स्थित भगवती पीताम्बरी माई के इस शक्तिपीठ का पुरातन स्वरूप बड़ा ही आकर्षक, मनोहारी एवं परम शान्तिदायक था। नैसर्गिक वातावरण के बीच स्थित यह शक्तिपीठ तब चारों ओर से सघन वनों से घिरा हुआ था। आश्रम से लगे वन क्षेत्र में दिन के समय में भी अनेक वन्य जीव यत्र-तत्र निर्भय होकर विचरते रहते थे। ऐसे भी प्रशंग मिलते हैं जब हिंसक वन्य जीव आश्रम परिसर में आ कर शान्त भाव से घंटों बैठे रहते थे और महाराज के सानिध्य में मानो भक्ति का लाभ उठाते थे। हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित आश्रम में नाना प्रकार के पक्षियों का मधुर कलरव यहां के दिव्य एवं मनोहारी वातावरण को और भी मोहक बना देता था। मन्द पवन के बीच रंग-विरंगे फूलों पर मंडराते भंवरों की गुंजन समूचे वातावरण में संगीत का अनुभव कराती प्रतीत होती थी। आश्रम में दूर-दूर से आकर सन्त-महात्मा एवं साधकगण नित्य ही शोभा पाते थे और पूज्यपाद अनन्त श्री महाराज जी के स्नेह,सानिध्य एवं मार्गदर्शन में मॉ भगवती पीताम्बरी देवी की कठोर व पवित्र साधना में रत रह कर अनेकानेक सिद्धियां अर्जित करते थे। सभी तरह की सिद्धियों में लोक कल्याण की पुनीत भावना सर्वोपरि रहती थी।आज भी शान्ति का यह स्वरुप यहां कायम है। महाभारत कालीन दंतवक्र के नाम के आधार पर दतिया का नाम जगत में प्रसिद्व हुआ दंतवक्र राजा शिशुपाल के परम मित्रों में एक थे। पीठ में स्थित वनखंडेश्वर मंदिर अश्वथामा की तपोस्थली के रुप में प्रसिद्व है कहा जाता है माई पीताम्बरी के दरवार में स्थित इस देव दरबार में झूठी कसम खाना महाअनर्थ का सूचक माना जाता है।दतिया देश के बुंदेलखंड प्रांत का एक शहर है। ग्वालियर से कुछ ही किमी० की दूरी पर यू०पी० की सीमा पर स्थित दतिया मध्य प्रदेश का लोकप्रिय तीर्थस्थलों में सबसे महत्वपूर्ण है।झांसी से यहां की दूरी पन्द्रह किलोमीटर है।इस मन्दिर के आसपास तीर्थ स्थलों की लम्बी श्रृखंला मौजूद है।यहां का किला भी अपनी पुरातन ऐतिहासिकता का प्रमाण देता है

इसी भूभाग में स्थित हनुमान गढ़ी का महत्व भी बड़ा ही निराला है इसी पावन धरा पर 7 नम्बम्बर को विशाल यज्ञ आयोजित होगा

जेल में चल रही रामलीला प्रकरण में बानर बन कर भागे दो कैदी जेलर सहित छह लोगों पर गिरी गाज

हरिद्वार: हरिद्वार जिला जेल से रामलीला के दौरान वानर का रोल अदा कर रहे दो कैदियों…

हिन्दू महासभा के आक्रोश प्रदर्शन से बुराड़ी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के डी सी और एम एल ओ का स्थानांतरण हुआ – बी एन तिवारी

  नई दिल्ली, बुराड़ी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से वाहन निरीक्षण सेंटर हटाकर झुलझुली स्थानांतरित करने पर आज…

प्रेस विज्ञप्ति

सादर प्रकाशनार्थ

 

 

वाराणसी 4.10.24

परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती 1008 ने काशी के सनातनी मन्दिरों से चांद मियां की प्रतिमा को हटाने को शास्त्रसम्मत व सराहनीय कार्य बताया है। साथ ही सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा की गिरफ्तारी पर रोष व्यक्त किया है।

ज्ञातव्य है कि इस समय काशी के परम्परागत सनातनी मन्दिरों से इस समय चांद मियां साईं के विग्रह को हटाया जा रहा है। इस सुकृत्य का स्वागत करते हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सनातनी मन्दिरों में पुजारियों व प्रबन्धकों की नासमझी, लापरवाही व शिथिलता से लोभ, भय अथवा अन्यान्य कारणों से ऐसी मूर्तियाँ स्थापित कर दी गईं जिनका सनातन धर्मशास्त्रों में न तो उल्लेख है, न तो कोई उनकी पूजा की विधि है और न ही सनातनधर्मियों को उनसे किसी भी प्रकार की प्रेरणा मिलती है।

कहा कि इस तरह के सनातन धर्म विरोधी कार्य से अपने सनातन धर्म के मन्दिरों को मुक्त कराने के लिए, परिसर में पुनः पवित्र वातावरण बनाने के लिए जागरुकता कुछ लोगों में आई। विशेष करके तब जब ये पता चला कि तिरुपति बालाजी जी मन्दिर से जो प्रसाद बांटा जा रहा था व लोगों को खरीदने पर मिल रहा था उसमें बहुत बड़ी मात्रा में बहुत लम्बे समय तक अखाद्य पदार्थ मिलाए जा रहे थे। ऐसे में शुद्धि के प्रति लोगों में मन मे भावना जागृत हुई। तब उन्होंने सोचा कि हमारे सनातनी मन्दिरों के परिसर में ये जो अशुद्धियों आ गई हैं इनको भी दूर किया जाना चाहिए और इसके लिए कुछ लोग खड़े हुए। ब्राह्मण सभा, सनातन धर्म रक्षक दल व अन्य ऐसी ही कई संस्थाओं के नाम हमको बताये गये और उन लोगों ने साईं की प्रतिमा सनातनी मन्दिरों से हटाने का सराहनीय कार्य किया।

उन लोगों ने कुछ मन्दिरों के लोगों से बात की और वहाँ के लोग भी तैयार हुए। तब बनी सहमति के आधार पर ऐसे जो प्रदूषक तत्व थे, मूर्ति थी उनको हटा दिया गया। ये काशी में एक अच्छा कार्य हो रहा था। हमको भी लोगों ने बताया था तो हमने कहा कि ये अच्छा कार्य है, अभिनन्दनीय है। ऐसे में अब पता चला है कि ऐसा उत्तम सनातनधर्मानुरूप जो कार्य था, मन्दिरों के परिष्कार का कार्य था, अशुद्धि को दूर करने का कार्य था उस कार्य में लगे लोगों में से एक पं अजय शर्मा जी को पुलिस ने किन्ही लोगों की शिकायत पर शान्ति भङ्ग की आशङ्का में गिरफ्तार कर लिया है और दूसरी अनेक धाराएं भी लगाई हैं।

वाराणसी प्रशासन के द्वारा ऐसा कार्य किया गया है। हम यही नही समझ पाते हैं कि अगर हम अपने मन्दिरों में कोई शुद्धि कर रहे हैं, परिष्कार कर रहे हैं तो उसमें लोगों को क्या आपत्ति हो सकती है? जो लोग ये कार्य कर रहे थे उन्होंने स्पष्टता के साथ कहा है कि अगर कोई किसी का भक्त है तो वो उनका अलग मन्दिर बनाए उसमें उसकी पूजा करे। हालांकि मन्दिर तो सनातनी देवताओं का होता है। लेकिन फिर भी इतने तक तैयार हैं कह रहे हैं अलग मन्दिर बना लें और अपने स्वयं पूजा करें तो जब इतनी बात कही जा रही है अपमान किसी का किया नही जा रहा है। कोई मूर्ति तोड़कर फेंकी नही जा रहा है।जब वहाँ से हटाया जा रहा तब उसे ढंक कर आदरपूर्वक हटाया जा रहा है ताकि किसी की भावना को ठेस न लगे। ये भी मीडिया में बात आई है कि उनको गङ्गा में प्रवाहित किया गया। गङ्गा में प्रवाहित करने का मतलब यह ही कि इस बात का ध्यान रखा गया कि कहीं कूड़े-कचरे में न फेंका जाए ताकि लोगों की भावना आहत न हो।

जब हम अपने सनातनधर्म का मन्दिर परिष्कृत कर रहे हैं और उसमें आए हुए अपशिष्ट को (हम तो यही कहेंगे) सम्मान के साथ विदा कर रहे हैं।उसके बाद भी कोई कह रहा है कि अशान्ति हो रही है तो यह बड़ा आश्चर्य है। जिस काशी में जाने कितने मन्दिरों को तोड़ करके वहाॅ पर लोग चढ़े बैठे हुए हैं उससे अशान्ति नहीं हो रही है और जब हम अपने मन्दिर का परिष्कार कर रहे हैं तो उससे अशान्ति हो जाएगी।

आगे कहा कि जब हम अपने पूज्यपाद गुरुदेव की आज्ञा से जो काशी में शिवलिंग प्रकट होने पर उसकी पूजा करने जा रहे थे तो हमको वहाँ के प्रशासन ने रोक दिया कि अशान्ति होगी। दुबारा हम परम्परा के अनुसार जब उस परिसर की परिक्रमा करने जा रहे थे तब भी हमें रोक दिया गया क्योंकि अशान्ति हो रही थी तो हम पूछना चाहते हैं कि क्या हिन्दू कुछ भी अपने धर्म के लिए करे उसमें अशान्ति हो जाती है और बाकी लोग जो चाहे करें उसमे कोई अशान्ति समाज में नहीं होती है? ये जो परिभाषा निकलकर धीरे-धीरे सामने आ रही है ये समझ से बाहर है। इसमें अपने को विचार करना पड़ेगा और हिन्दुओं को भी तत्पर होना पड़ेगा। आखिर ये क्या है और प्रशासन को केवल अशान्ति हिन्दुओं से है?

अभी सबसे पहले तो आवश्यक है कि एक व्यक्ति जो सनातन धर्म का ही अंग है, एक संस्था जो हमारे सनातन धर्म का ही अंग है और उस व्यक्ति संस्था द्वारा वो कार्य किया जा रहा था जो सचमुच सनातनधर्मियों द्वारा कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन उसको करने वाले को धारा लगाकर पुलिस गिरफ्तार करके ले जाती है तो हमारा ये कर्तव्य बन जाता है कि हम उस व्यक्ति उस संस्था के साथ खड़े हों एक सनातनधर्मी होने के नाते और इसीलिए हम उस संस्था व व्यक्ति के साथ खड़े हैं।हम ये नही कह रहे हैं कि अशान्ति मचाई जाए हम ये भी नहीं कह रहे हैं कि कोई उपद्रव किया जाए।लेकिन ये जरूर कह रहे हैं कि इस समय हम सनातनधर्मियों को खड़े होकर अजय शर्मा जी के लिए जो कानूनी मदद हो वो करनी चाहिए। अच्छे से अच्छे वकील खड़ा करना चाहिए ताकि अजय शर्मा जी पुलिस के बन्धन से मुक्त हो सकें। बिना कारण उनको जेल न भेजा जाए, उनका जमानत करा किया जाए और उनका मुकदमा हम लोग कानून की परिधि में रहकर दृढ़ता से लड़ेंगे।

उक्त जानकारी देते हुए परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि इस समय पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने व गोकशी बन्द कराने हेतु 36 राज्यों के राजधानी में गौध्वज स्थापित करने हेतु सम्पूर्ण राष्ट्र में भ्रमण कर रहे हैं।पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज के कठिन तप व अथक प्रयास के परिणामस्वरूप गौमाता महाराष्ट्र में राज्य माता घोषित हो चुकी हैं।

महाराजश्री को भारत भ्रमण के दौरान जब ज्ञात हुआ कि काशी में साई की प्रतिमा हटाई जा रही है और उस सुकृत्य को सम्पादित करने वाले पं अजय शर्मा को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है तो उन्होंने ऑडियो रिकार्डिंग के माध्यम से अपना सन्देश सम्प्रेषित किया हैं।

परमधर्माधीश शङ्कराचार्य जी महाराज ने अनेकों बार दृढ़ता से कहा है कि सनातनधर्म शास्त्रानुसार चलता है।शास्त्र में जिसका उल्लेख नहीं वो अपूज्य है और हम सनातनधर्मियों के मन्दिरों में अपूज्य की पूजा कदापि नहीं हो सकती है। साईं बाबा एक मुस्लिम फकीर थे उनको हमारे मन्दिरों में प्रतिष्ठित करना अपराध है। फिर भी अगर किसी को साईं बाबा की पूजा करनी है तो उनका अलग मन्दिर बना लें हमें कोई आपत्ति नही है।लेकिन चांद मियां साईं को हमारे शिवलिंग पर बैठा दिखाना, साईं के हाथ मे सुदर्शन चक्र थमाना,भगवान के विराट स्वरूप के मध्य साईं का चित्र बनाना, ॐ नमः शिवाय की जगह ॐ साईं नमः कहना, सीताराम की जगह साईं राम कहना, साईं चालीसा और साईं गायत्री बनाना कत्तई स्वीकार नही है।हमारे ब्रह्मलीन गुरुदेव ने पहले ही न्यायालय और हर जगह प्रमाण प्रस्तुत करवा दिया है और धर्मनिर्णय भी दिया है। अब बस क्रियान्वयन बाकी है।

प्रेषक
संजय पाण्डेय-मीडिया प्रभारी।
परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज