उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मिली नई पहचान 

  • मयंक मारवाह बने राज्य के पहले ISSF-A लाइसेंस प्राप्त शूटिंग कोच
देहरादून। दून इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग एंड स्पोर्टस (डालनवाला) के सीनियर कोच, मेंटर और ISSF B जज मयंक मारवाह ने शूटिंग (निशानेबाज़ी) के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। मयंक मारववाह उत्तराखंड के पहले ISSP A-ताइसेंस प्राप्त कोच बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि प्रदेश के खेल और निशानेबाज़ी जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है जिसने उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।
उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए सीनियर शूटिंग (निशानेबाज़ी) कोच मयंक मारवाह को ISSF A- A-लाइसेंस प्रदान किया गया है। यह शूटिंग खेल में दिया जाने वाला सबसे उच्च अंतरराष्ट्रीय कोचिंग प्रमाणपत्र है, जिसे विश्व की शीर्ष संस्था International Shooting Sport Federation (ISSF) द्वारा प्रदान किया जाता है।
 ISSF A-लाइसेंस, मयंक मारवाह को ISSF वर्ल्ड कप फाइनल्स दोहा (क़तर) के दौरान प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें ISSF के अध्यक्ष लुसियानो रोसी तथा ISSE अकादमी (Finland) के निदेशक डॉ. वेसा द्वारा दिया गया। इस उपलब्धि के साथ मयंक मारवाह उत्तराखंड के इतिहास में ISSE A-लाइसेंस प्राप्त करने वाले पहले कोच बन गए हैं।इससे पूर्व मयंक मारवाह पिस्टल और शॉटगन दोनों शूटिंग इवेंट्स में ISSF B-लाइसेंस प्राप्त कर चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ भी वे उत्तराखंड के पहले कोच बने थे, जिन्होंने दोनों इवेंट्स में यह सम्मान हासिल किया। यह ISSF B-लाइसेंस उन्हें फिनलैंड में प्रदान किया गया था।
उन्होंने कहा कि फिनलैंड में ISSF B-लाइसेंस से लेकर दोहा वर्ल्ड कप फाइनल्स में ISSF A-लाइसेंस तक की यह यात्रा वर्षों की मेहनत, निरंतर सीख और इस संकल्प का परिणाम है। लाइसेंस यह प्रमाणित करता है कि कोच को शुटर्स में विजयी सोच और चैम्पियन मानसिकता विकसित करने दबाव में प्रदर्शन, भावनात्मक संतुलन, नेतृत्व, आत्मविश्वास एवं दीर्घकालिक खिलाडी विकास में उच्च स्तर की महारत ओलंपिक और विश्व स्तर की कोचिंग प्रणालियों, खेल विज्ञान, बायोमैकेनिक्स और प्रदर्शन विश्लेषण, मानसिक मज़बूती, प्राप्त है।
सीनियर कोच और मेंटर मयंक मारवाह ने कहा कि उनका लक्ष्य उत्तराखंड में एक ऐसी समग्र प्रणाली स्थापित करना है. जहां खिलाड़ी जमीनी स्तर से लेकर ओलंपिक तक केवल तकनीकी रूप से नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और चरित्र के स्तर पर भी विजेता बनें। भविष्य की रणनीति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनका फोकस प्रारंभिक स्तर पर प्रतिभा पहचान, दीर्घकालिक खिलाड़ी विकास मॉडल, तकनीक फिटनेस-मानसिक प्रशिक्षण का संतुलन, राष्ट्रीय, एशियाई, वर्ल्ड कप और ओलंपिक स्तर की तैयारी, तथा कोचिंग व सपोर्ट सिस्टम के पेशेवर विकास पर रहेगा।
उन्होंने बताया कि दून इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग एंड स्पोर्ट्स ने  अब तक 5000 से अधिक शूटर्स को प्रशिक्षित किया है और अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता तैयार किए हैं। संस्थान की स्थापना उनके पिता स्वर्गीय  एसएम मारवाह (पूर्व BSF कमांडेंट एवं एशियाई व राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता) तथा उनकी माता  मधु मारवाह (निदेशक DISS) द्वारा की गई थी। अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ विकसित की गई संस्था आज उत्तराखंड में शूटिंग खेल की एक मजबूत आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और खेल मंत्री रेखा आर्य से आग्रह किया कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से उत्तराखंड शूटिंग और खेलों को अंतरराष्ट्रीय ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सके।

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