इंडिया ऑटिज्म सेंटर: ‘ऑटिज्म इन प्रैक्टिस’ से माता-पिता को जीवनभर देखभाल के लिए बनाया सशक्त

देहरादून। इंडिया ऑटिज्म सेंटर (आईएसी) ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता माह के दौरान “ऑटिज्म इन प्रैक्टिस” कार्यक्रम आयोजित कर ऑटिज्म और न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियों वाले व्यक्तियों की जीवनभर देखभाल पर माता-पिता केंद्रित संवाद का नेतृत्व किया। सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी बंगाल के सहयोग से आयोजित इस श्रृंखला में विशेषज्ञों ने व्यावहारिक ज्ञान साझा किया।
कार्यक्रम की शुरुआत आईएसी के निदेशक एवं सीईओ श्री जैशंकर नटराजन के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा, “जागरूकता के साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन जरूरी है। यह पहल परिवारों को सही निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।” उन्होंने आईएसी के आगामी आवासीय इकोसिस्टम ‘समावेश’ का जिक्र किया, जो नवंबर 2026 में कोलकाता के निकट खुलेगा और वयस्कावस्था तक सुरक्षित, समावेशी देखभाल प्रदान करेगा। विभिन्न सत्रों में डॉ. मनीष समनानी ने ऑक्यूपेशनल थेरेपी पर व्यावहारिक रणनीतियां बताईं। डॉ. रुद्रजीत सिन्हा ने “मेडिसिन्स एंड बियॉन्ड” सत्र का संचालन कर चिकित्सा, व्यवहार और थेरेपी के संतुलित दृष्टिकोण पर जोर दिया। प्रो. डॉ. कल्पना दत्ता ने बच्चों के पोषण और खाने की चुनौतियों पर चर्चा की, जबकि सुश्री रंजना चक्रवर्ती ने प्री-टीन और टीन बच्चों के व्यवहार सुधार, भावनात्मक नियंत्रण तथा सामाजिक कौशलों पर प्रकाश डाला। माता-पिता नीलांजना रामबोथु और सुश्री सुमित्रा पॉल बक्शी ने अपनी अनुभव यात्रा साझा की। कार्यक्रम में डॉ. सुदीप साहा, डॉ. अरिजीत चट्टोपाध्याय, डॉ. जशोधरा चौधुरी समेत कई बाल न्यूरोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. रुद्रजीत सिन्हा ने कहा, “ऑटिज्म जागरूकता रोजमर्रा की समझ होनी चाहिए। सही हस्तक्षेप और समाज की स्वीकृति से स्पेक्ट्रम वाले व्यक्ति संतोषजनक जीवन जी सकते हैं।” कार्यक्रम का समापन डॉ. जशोधरा चौधुरी और सखी सिंघी के वक्तव्य से हुआ। यह पहल आईएसी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो प्रारंभिक हस्तक्षेप से आगे बढ़कर आवासीय देखभाल तक परिवारों का साथ दे रही है।

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