उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है आज हम ऐसे देवता ऐसे गुरु का वर्णन करते हैं जिन्हें नाथ समुदाय के श्रेष्ठ भी कहते हैं और गुरु गोरखनाथ के चेले भी जिनके नाम मात्र से टल जाते हैं बड़े से बड़े संकट

पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पहले स्यालकोट पंजाब जो अब पाकिस्तान मे है उनके राजा के एक बेटे हुये वो थे चौरंगी नाथ कहते है उनकी सौतेली माँ ने उनको कुछ असभ्य आरोपो के चलते राजा से कहकर उनके हाथ पांव कटवा कर कुएं मे फेकवा दिया लेकिन कहते है जाको राखे साईंया मार सके नही कोई
कुछ समय बाद वहा से गुरु गौरख नाथ भ्रमण पर जा रहे थे उनके चेलो ने उन्हे देख लिया और वो गुरु जी के पास उन्हे ले आये गुरु गौरखनाथ जी ने उन्हे अपनी शक्ति से उनके हाथ पांव जोड कर पुन: ठीक कर दिये और उन्हे चौरंगी नाथ का नाम दिया और अपना शिष्य बना दिया धीरे धीरे वो तप मे लीन हो गये और उनकी ख्याति हर और फैलनी लगी
अब लोग उन्हे न्याय का देवता भी कहने लगे वही उनकी सौतेली मां को पता लगा तो वो उनके पास चले गये क्योंकि उनकी कोई संतान नही हो रही थी जब वो वहां जाते है तो चौरंगी नाथ जी को पहचान लेते है जिससे वो क्षमा याचना करते है लेकिन चौरंगी नाथ उन्हे पुत्रप्राप्ति का आशीर्वाद देकर लौट चलते है
उनके राज्य मे सभी सुख समृद्धि लौट आती है और चौरंगी नाथ नाथ समुदाय के अग्रणी बन जाते है
उत्तराखंड के पौनी बासर एक गांव मे आज भी इनकी पूजा व मंदिर है जिसमे लोग दूर दूर से मंन्नत मांगने आते है
चौरंगी नाथ अपनी भक्तो को कभी खाली हाथ नही लौटाते उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है
अगर कोई किसी गरीब असाहय के साथ अन्नाय करता है तो लोग चौरंगी नाथ के नाम मात्र से ही वो उसकी सहयता करते है ऐसी मान्यता है ।
पौराणिक तथ्यो के अनुसार गुरू चौरंगी नाथ न्याय प्रिय देवता है
लोग उन्हे हर विपत्ति मे याद करते है
