‘गांव का पानी–गांव की बोतल’

– ककाड़ी गांव से अनोखी शुरुआत: बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

– सामूहिक प्रयासों से समाज में बड़ा परिवर्तन संभव 

साहिया। सरदार महिपाल राजेन्द्र जनजातीय पी.जी. कॉलेज, साहिया की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई का सात दिवसीय विशेष शिविर विकासखंड कालसी के ग्राम ककाड़ी में संचालित हो रहा है। शिविर के अंतर्गत एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्रामवासियों के साथ एक सामूहिक बैठक आयोजित की, जिसमें समाज में बढ़ती फिजूलखर्ची, विशेषकर विवाह समारोहों में होने वाले अनावश्यक खर्चों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि इस पहल का उद्देश्य किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक जागरूकता उत्पन्न करना है। चर्चा के दौरान बताया गया कि आजकल विवाह समारोहों में बड़ी मात्रा में बाजार से बोतलबंद पानी मंगाया जाता है, जिससे अनावश्यक आर्थिक व्यय बढ़ जाता है।
ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने सुझाव दिया कि यदि विवाह या धार्मिक आयोजनों में बाजार से पानी मंगाने के बजाय गांव के स्वच्छ प्राकृतिक जल का उपयोग किया जाए और खाली बोतलों को स्थानीय स्तर पर भर लिया जाए, तो खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। चर्चा में यह भी बताया गया कि यदि जौनसार-बावर क्षेत्र की लगभग 200 शादियों में इस प्रकार का छोटा सा प्रयास किया जाए तो लगभग 50 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक बचत संभव हो सकती है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के चेयरमैन अनिल सिंह तोमर ने कहा कि समाज में बढ़ती अनावश्यक खर्च की प्रवृत्ति को कम करने के लिए इस प्रकार की पहल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि गांव स्तर पर लोग अपने संसाधनों का सही उपयोग करें और सामूहिक रूप से छोटे-छोटे सुधारात्मक कदम उठाएं, तो इससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।ग्राम प्रधान सुंदर सिंह बिष्ट ने बताया कि ग्रामवासियों के साथ आयोजित बैठक में यह सामूहिक निर्णय लिया गया है कि अब गांव में होने वाले विवाह समारोहों और धार्मिक आयोजनों में यथासंभव अपने ही प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पानी पहाड़ की जड़ी-बूटियों से युक्त और स्वच्छ माना जाता है, इसलिए इसे अपनाने से जहां आर्थिक बचत होगी वहीं स्थानीय संसाधनों के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा। प्रधान ने यह भी कहा कि आयोजनों में उपयोग होने वाली प्लास्टिक की बोतलों को एकत्रित कर उन्हें रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि प्लास्टिक कचरे को कम किया जा सके और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सके।
शिविर के छठे दिवस के अवसर पर आत्मनिर्भरता, कौशल विकास एवं ग्रामीण विकास विषय पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकासखंड कालसी के खंड विकास अधिकारी जगत सिंह ने पानी की बोतल भरकर इस पहल का शुभारंभ करते हुए स्वयंसेवकों को संबोधित किया और कहा कि पहाड़ की वास्तविक ताकत यहां की सामूहिकता और सामाजिक एकता में निहित है। यदि गांव स्तर पर लोग मिलकर ऐसे छोटे-छोटे सुधारात्मक प्रयास शुरू करते हैं, तो उससे समाज में बड़े सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने कहा कि युवा यदि समाज की समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ें, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन सकता है।

पारंपरिक शिल्पकला का दिया प्रशिक्षण

द्वितीय सत्र में स्थानीय काष्ठ शिल्पकार थेपा दास एवं परम दास ने स्वयंसेवकों को पारंपरिक शिल्पकला का प्रशिक्षण दिया और बांस के शिल्प निर्माण की मूल तकनीकों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि स्थानीय हस्तशिल्प न केवल रोजगार का साधन बन सकता है बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी वरुण प्रसाद सेमवाल, सामाजिक एवं जनसंपर्क विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू देवी, सहायक प्राध्यापक रिंकू दास भारती, भारत सिंह, मुकेश तोमर सहित एनएसएस स्वयंसेवक एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

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