देहरादून। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में तीन दिवसीय 10वीं राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का भव्शुय आगाज हुआ। इस मौके पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया ने उत्तरांचल रजत जयंती व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत ‘भारत के संविधान में न्याय की परिकल्पना’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने न्याय, समानता और मानवीय गरिमा को संविधान की मूल भावना बताया।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी ने न्यायमूर्ति धुलिया का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विधि जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों को विद्यार्थियों के बीच लाकर उन्हें अनुभव, ज्ञान और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों से सफल विधिवेत्ताओं के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति धुलिया ने कहा कि भारतीय संविधान मूलतः एक सामाजिक दस्तावेज है, जिसके केंद्र में न्याय की अवधारणा निहित है। वास्तविक न्याय के लिए न्यायपूर्ण समाज का निर्माण आवश्यक है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार, सुरक्षा, अवसर और सम्मान प्राप्त हों। कानून के समक्ष समानता और मानवीय गरिमा ऐसे समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना न्याय को विशेष महत्व देती है और विविधताओं से भरे देश को एकता के सूत्र में बांधने में संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका है।विधि विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवन के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि कानून का पेशा समाज को करीब से समझने का अवसर देता है। इसके लिए विद्यार्थियों को स्क्रीन टाइम नियंत्रित कर पुस्तकालय जाने और पुस्तकों से मित्रता करने की आदत विकसित करनी चाहिए। मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, अभिव्यक्ति, तर्कशक्ति और शिष्टाचार को निखारती हैं तथा वकालत के व्यावहारिक प्रशिक्षण की मजबूत नींव रखती हैं। देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाने की लॉ कॉलेज देहरादून की पहल को उन्होंने सराहनीय और अनूठा प्रयास बताया। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी ने न्यायमूर्ति धुलिया का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विधि जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों को विद्यार्थियों के बीच लाकर उन्हें अनुभव, ज्ञान और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों से सफल विधिवेत्ताओं के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. धर्मबुद्धि, उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा, प्राचार्य प्रो. पूनम रावत सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, गणमान्य अतिथि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।