रोज 60 ग्राम बादाम… नींद हो सकती है बेहतर!

देहरादून। रात को बिस्तर पर जाने के बाद देर तक नींद का इंतजार करने वालों के लिए रोजाना बादाम का सेवन एक उपयोगी फूड-फर्स्ट विकल्प हो सकता है। खराब नींद की गुणवत्ता की शिकायत करने वाले भारतीय वयस्कों पर हुई एक नई रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल में रोजाना बादाम खाने वाले प्रतिभागियों ने नींद से जुड़े कई पहलुओं में बेहतर अनुभव की जानकारी दी।

‘फ्रंटियर्स इन रिसर्च’ में प्रकाशित देसाई एट अल., 2026 की इस रिसर्च में 21 से 55 वर्ष की उम्र के 175 भारतीय वयस्क शामिल थे। प्रतिभागियों को दो समूहों में रखा गया। एक समूह को रोजाना 60 ग्राम बादाम यानी करीब 50 बादाम दिए गए, जबकि दूसरे समूह को समान कैलोरी वाला कंट्रोल स्नैक दिया गया, जिसमें खाखरा, चिवड़ा और क्रैकर्स शामिल थे। अध्ययन में बादाम खाने वाले प्रतिभागियों ने अपनी नींद की कुल गुणवत्ता में सुधार की जानकारी दी। स्लीप एफिशिएंसी यानी बिस्तर पर बिताए गए कुल समय में से सोने में बिताए समय के अनुपात में भी बेहतर परिणाम सामने आए। प्रतिभागियों ने यह भी बताया कि उन्हें नींद आने में पहले की तुलना में कम समय लगा। रात के दौरान जागने को लेकर भी कुछ सकारात्मक संकेत मिले, हालांकि यह प्रभाव अध्ययन के सभी प्रतिभागियों में लगातार सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं रहा।

बादाम में क्या है खास?

बादाम मैग्नीशियम और ट्रिप्टोफैन समेत कई पोषक तत्वों का स्रोत है। मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। वहीं ट्रिप्टोफैन का इस्तेमाल शरीर सेरोटोनिन और मेलाटोनिन बनाने के लिए करता है। बादाम में असंतृप्त वसा और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं तथा प्राकृतिक रूप से थोड़ी मात्रा में मेलाटोनिन मौजूद होता है। न्यूट्रिशन एंड वेलनेस कंसल्टेंट शीला कृष्णास्वामी के अनुसार, नींद संपूर्ण स्वास्थ्य और सेहत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और संतुलित पोषण स्वस्थ जीवनशैली में भूमिका निभा सकता है। उनके मुताबिक, अध्ययन में खराब नींद की गुणवत्ता वाले वयस्कों में रोजाना बादाम के सेवन के बाद नींद से जुड़े अनुभवों में सुधार के संकेत मिले हैं।

फूड-फर्स्ट अप्रोच को मिला नया संकेत

अध्ययन के निष्कर्ष इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए जीवनशैली और खान-पान में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, यह अध्ययन बादाम को नींद की समस्या का इलाज साबित नहीं करता। इसके निष्कर्ष मुख्य रूप से प्रतिभागियों द्वारा बताई गई नींद की गुणवत्ता और अन्य नींद संबंधी अनुभवों पर आधारित हैं।

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