संघर्ष से सफलता तक: सूर्यांश पंथ ने लिखी प्रेरणा की नई इबारत

– विषम परिस्थितियों में हासिल किए 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 68.2% अंक 

देहरादून। सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल के छात्र सूर्यांश पंथ ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं। तमाम संघर्षों और अभावों के बीच सूर्यांश ने कक्षा 12वीं की परीक्षा में 68.2 प्रतिशत अंक हासिल कर सफलता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी को प्रेरित कर रही है।

सूर्यांश का जीवन आसान नहीं रहा। वर्ष 2012 में हृदयाघात के कारण उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी माँ गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रही हैं और काम करने में असमर्थ हैं। आर्थिक संकट के बीच बेटे की पढ़ाई जारी रखना परिवार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। ऐसे कठिन समय में विपिन बलूनी परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए।

सूर्यांश की प्रतिभा और संघर्ष को देखते हुए विपिन बलूनी ने उन्हें कक्षा 5वीं से लेकर 12वीं तक पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई। आठ वर्षों तक स्कूल ने केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह हर कदम पर उसका साथ निभाया। बेटे के शानदार परिणाम के बाद सूर्यांश की माँ भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा, “विपिन बलूनी सर हमारे लिए मसीहा बनकर आए। उन्हीं की वजह से आज मेरा बच्चा इस मुकाम तक पहुंच पाया है। सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाना मेरा सपना था, जिसे उन्होंने सच कर दिखाया।” वहीं विपिन बलूनी ने कहा कि प्रतिभा को कभी आर्थिक अभाव के कारण रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि बच्चे में मेहनत और लगन हो तो समाज और संस्थाओं का दायित्व है कि वे उसके सपनों को पंख दें।”

आज सूर्यांश की सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि संघर्ष, संवेदना और सहयोग की जीत बन गई है। उनकी आँखों में दिवंगत पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प है, जबकि माँ की आँखों में गर्व और खुशी के आँसू साफ दिखाई देते हैं। यह कहानी बताती है कि जब शिक्षा सेवा का माध्यम बन जाए, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।

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