– लॉ कॉलेज देहरादून की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में डिजिटल प्रतिबंधों और मौलिक अधिकारों पर गूंजीं दमदार दलीलें
देहरादून। संविधान, मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर धारदार दलीलें, न्यायाधीशों के सवालों पर सटीक जवाब और अदालत जैसा गंभीर माहौल। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में आयोजित 10वीं राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के फाइनल में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। देश के 15 राज्यों के 90 विश्वविद्यालयों की भागीदारी वाले इस प्रतिष्ठित आयोजन में गुजरात की निरमा यूनिवर्सिटी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता की ट्रॉफी अपने नाम की, जबकि सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नोएडा उपविजेता रहा।
तीन दिवसीय प्रतियोगिता के अंतिम मुकाबले में छात्र अधिवक्ताओं ने जेन-जी आंदोलन और उससे जुड़ी सरकारी कार्रवाई के संदर्भ में एक काल्पनिक याचिका पर बहस की। डिजिटल मंचों को अवरुद्ध करने, आपराधिक कार्रवाई, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर प्रतिबंध और सरकारी आश्वासनों की वैधता को चुनौती देते हुए दोनों पक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 19, 21 और 22 सहित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर अपने तर्क रखे। उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशीष नैथानी ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभाई। निर्णायक मंडल में अधिवक्ता टीएस बिंद्रा, ऑबेरॉय लॉ चैंबर्स, चंडीगढ़ के प्रमुख अधिवक्ता गगन ऑबेरॉय, लॉ कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पूनम रावत और डीन प्रो. राजेश बहुगुणा शामिल रहे। न्यायमूर्ति नैथानी ने प्रतिभागियों की पैरवी की सराहना करते हुए कहा कि संविधान मौलिक अधिकारों के साथ उचित प्रतिबंधों और मौलिक कर्तव्यों की भी व्यवस्था करता है। अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन ही संविधान की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि छात्र अधिवक्ताओं की प्रभावशाली प्रस्तुति ने लॉ कॉलेज में सुप्रीम कोर्ट जैसा दृश्य साकार कर दिया। उनकी दलीलें सुनकर एक क्षण के लिए ऐसा लगा, मानो कोई अनुभवी वरिष्ठ अधिवक्ता अपनी पैरवी कर रहा हो। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेंद्र जोशी ने बताया कि प्रतियोगिता में 51 निर्णायकों और 39 न्यायालयों की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जुटी टीम की सराहना की। अधिवक्ता टीएस बिंद्रा ने कहा कि मूट कोर्ट में अधिवक्ता की भूमिका बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि न्यायाधीश के सवालों का तथ्यपरक और सटीक जवाब देना पड़ता है। उन्होंने विधि क्षेत्र में एआई के बढ़ते उपयोग पर कहा कि तकनीक सहायक हो सकती है, लेकिन उसके संभावित मिथ्याभास से सावधान रहना जरूरी है।
पुरस्कारों में भी प्रतिभाओं का दबदबा
डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, सोनीपत को सर्वश्रेष्ठ महिला अधिवक्ता और सर्वश्रेष्ठ रिसर्चर का पुरस्कार मिला। गुरुनानक लॉ कॉलेज, सियांवाला, पंजाब के प्रतिभागी सर्वश्रेष्ठ पुरुष अधिवक्ता चुने गए, जबकि लॉयड लॉ कॉलेज, उत्तर प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल का खिताब मिला।
कार्यक्रम को प्रो. राजेश बहुगुणा, अधिवक्ता गगन ऑबेरॉय और डॉ. पूनम रावत ने भी संबोधित किया। संचालन डॉ. ऐश्वर्या सिंह के नेतृत्व में मूट कोर्ट सोसाइटी के विद्यार्थियों ने किया।