खाद्य सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी, खाद्य बर्बादी रोकने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

– ग्राफिक एरा और सेंटर फॉर एरोमैटिक प्लांट्स के बीच एमओयू

– 136 शोध पत्र और 158 शोध सार प्रस्तुत

देहरादून। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुधारने और खाद्य बर्बादी कम करने में आधुनिक तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। खाद्य अपशिष्ट से उपयोगी जैव उत्पाद तैयार करने, माइक्रोप्लास्टिक के प्रभाव को कम करने और पौधों से प्रोटीन के बेहतर विकल्प विकसित करने जैसे नवाचार टिकाऊ खाद्य प्रणाली के लिए जरूरी हैं। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने खाद्य तकनीक, सुरक्षा और पोषण से जुड़ी इन चुनौतियों पर चर्चा करते हुए अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में खाद्य तकनीक, सुरक्षा और पोषण में आधुनिक तकनीक एवं नवाचार विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में मुख्य अतिथि सेंटर फॉर एरोमैटिक प्लांट्स, देहरादून के निदेशक डॉ. निरपेंद्र कुमार चौहान ने कहा कि खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष और एडिटिव्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सुरक्षित खाद्य उत्पादन के लिए कीटनाशकों का संतुलित उपयोग, खाद्य गुणवत्ता की नियमित जांच और निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक है। उन्होंने खाद्य पदार्थों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि प्लांट बेस्ड मीट के विकल्पों की गुणवत्ता, बनावट और पोषण संबंधी विशेषताएं उनमें इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटीन के स्रोत पर निर्भर करती हैं। उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों और उनके फंक्शनल गुणों का सही इस्तेमाल इन उत्पादों के स्वाद, बनावट और पोषण मूल्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने खाद्य तकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार की उपयोगिता को रेखांकित किया।

अनुसंधान और अकादमिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

संगोष्ठी के दौरान ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेंटर फॉर एरोमैटिक प्लांट्स, देहरादून के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इससे खाद्य विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में शोध और नवाचार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोधकर्ताओं ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की। ओरल और पोस्टर सत्रों के अंतर्गत कुल 136 शोध पत्र और 158 शोध सार (एब्स्ट्रैक्ट) प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से खाद्य तकनीक, सुरक्षा, पोषण और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध कार्य साझा किए गए। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी और डिपार्टमेंट ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट ने एसोसिएशन ऑफ फूड साइंटिस्ट्स एंड टेक्नोलॉजिस्ट्स, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से किया।

कार्यक्रम में प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विनोद कुमार, डिपार्टमेंट ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट के प्रमुख डॉ. अमर डबराल, डॉ. सलोनी जोशी, डॉ. कृष्णा आयुष, डॉ. रितेश मिश्रा, डॉ. श्वेता जोशी, डॉ. विनय कुमार पांडेय, डॉ. रवनीत कौर, डॉ. योगेश कुमार और डॉ. अफरीन परवीन सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकिता डोभाल ने किया।

 

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