– लाॅ काॅलेज देहरादून में राष्ट्रीय विधिक सहायता योजना ड्राफ्टिंग प्रतियोगित
देहरादून। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज में राष्ट्रीय विधिक सहायता योजना ड्राफ्टिंग कम्पीटिशन का आयोजन किया गया। देश के 23 विश्वविद्यालयों की टीमों ने भागीदारी की।
बुधवार को प्रतियोगिता का शुभारंभ देहरादून जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सीमा डुंगराकोटी ने किया। बतौर मुख्य अतिथि सीमा डुंगराकोटी ने समाज के सभी वर्गों खासकर पिछड़ें और हाशिए पर पड़े लोगों तक न्याय पहुँचाने में कानूनी मदद की सबसे ज़्यादा अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रतियोगिता में प्रतिभाग लेने वालों के नये और प्रैक्टिकल तरीकों की दिल से तारीफ की और असल दुनिया की कानूनी चुनौतियों से निपटने में उनके प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने लाॅ काॅलेज देहरादून द्वारा प्रतियोगिता को एक व्यावहारिक उन्मुख दृष्टिकोण बताया और काॅलेज का एक अनुकरणीय प्रयास बताया। प्रतियोगिता का पहला राउंड आनलाईन माध्यम से हुआ, जबकि अंतिम मुकाबला हाइब्रिड मोड में था। प्रतिभागियों द्वारा वांछित लाभार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर अपनी-अपनी योजनाएं प्रस्तुत की गई। मुख्यकर वरिष्ठ नागरिक, एच0आई0वी पीड़ित, कस्टोडियल डेथ सहित अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए अपनी प्रस्तावित योजनाओं को प्रदर्शित किया। इस अवसर पर विधिक प्रगति नामक वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन किया गया। विवि
के कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि ने कानूनी पढ़ाई में ड्राफ्टिंग स्किल्स की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने छात्रों को रोज़ाना ड्राफ्टिंग की आदत डालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि लगातार अभ्यास करने से न सिर्फ़ काूननी समझ और एनालिटिकल सोच बेहतर होती है बल्कि काूननी पेशे में प्रोफेशनल काबिलियत और पैसे का फायदा भी बढ़ता है। लाॅ काॅलेज के डीन प्रो. राजेश बहुगुणा ने प्रतियोगिता को छात्रों के लिए उपयोगी बताया। कड़े मुकाबलें के बाद निर्णायक मण्डल द्वारा स्कूल आफ लाॅ, नारसी मोंजी बेंगलुरू को प्रथम, यूनिवर्सिटी आफ दिल्ली को द्वितीय व हिमाचल प्रदेश नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी शिमला को तृतीय विजेता घोषित किया गया। इस मौके पर विवि के डा. राधेश्याम झा, वत्सल चैधरी, एडवोकेट नीतिश बुडोला, डा0. रमाकांत त्रिपाठी, डा0. भावना अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
