देहरादून। आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर जमीयत उलेमा देहरादून ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे धार्मिक कुर्बानी के दौरान कानून, शरई हिदायतों और सामाजिक सौहार्द का पूरी तरह पालन करें। संगठन ने स्पष्ट किया कि कुर्बानी का उद्देश्य केवल अल्लाह की रज़ा हासिल करना है, न कि किसी प्रकार का प्रदर्शन या विवाद उत्पन्न करना।
आज़ाद कॉलोनी स्थित मदरसा दार-ए-अरकम में आयोजित बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि ऐसा कोई कार्य न किया जाए जिससे किसी प्रकार का तनाव या विवाद उत्पन्न हो। बैठक में यह भी अपील की गई कि कुर्बानी केवल निर्धारित और वैध स्थानों पर ही की जाए। सड़क, गली, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी से बचने की सलाह दी गई। साथ ही प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया गया। संगठन ने लोगों से यह भी अपील की कि कुर्बानी से संबंधित फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न किए जाएं, क्योंकि इससे कई बार अनावश्यक विवाद और गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं।
स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष जोर देते हुए कहा गया कि कुर्बानी के बाद अवशेष, खून और गंदगी को तुरंत साफ किया जाए तथा सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखा जाए। इसे कानून के साथ-साथ धार्मिक शिक्षाओं के अनुरूप भी बताया गया। जमीयत उलेमा ने अफवाहों और भड़काऊ संदेशों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की स्थिति में तत्काल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी जाए। साथ ही मस्जिदों के इमामों से भी नमाज के दौरान अमन, भाईचारे और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार का संदेश देने की अपील की गई।
