हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के साइबर अपराध हॉटस्पॉट अभियान के तहत हरिद्वार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नालंदा-नवादा से हरिद्वार तक फैले एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। श्यामपुर पुलिस ने स्विफ्ट कार की चेकिंग के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 35 एटीएम कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 37,500 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं।
पुलिस के अनुसार 25/26 अगस्त की रात श्यामपुर पुलिस संदिग्ध वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान सज्जनपुर पीली क्षेत्र में मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद स्विफ्ट कार में साइबर ठगी से जुड़े लोग सवार हैं। पुलिस ने रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर चेकिंग शुरू की। कुछ देर बाद चिड़ियापुर की ओर से आई स्विफ्ट कार संख्या यूके-08एएफ-0560 को रोककर तलाशी ली गई। कार में सवार पांच लोगों के पास से एक बैग बरामद हुआ, जिसमें साइबर ठगी से संबंधित बड़ी मात्रा में सामग्री मिली। बरामद 14 बैंक पासबुकों में भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और नैनीताल बैंक समेत कई बैंकों के खाते मिले। एटीएम कार्डों में भी देश के विभिन्न बैंकों के कार्ड शामिल हैं। खातों का संबंध हरिद्वार, ऋषिकेश, कनखल, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से सामने आया है। मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच में व्हाट्सऐप बातचीत, बैंक खातों की जानकारी, क्यूआर कोड और लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस के अनुसार आरोपी स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम हासिल करते थे। साइबर ठगी की रकम पहले इन खातों में पहुंचती, फिर यूपीआई के जरिए दूसरे खातों में भेजकर एटीएम अथवा नकद निकासी मशीन से रकम निकाल ली जाती थी। इसके बाद रकम को गिरोह के सदस्यों के बीच कमीशन के रूप में बांटा जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कृष्णा पाण्डे, निरंजन कुमार, सन्नी, चन्द्रमणि कुमार और चन्दन पाण्डे के रूप में हुई है। इनमें अधिकांश बिहार के नालंदा और नवादा के निवासी हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मोबाइल और लैपटॉप की विस्तृत डिजिटल जांच के साथ बैंक खातों की लेन-देन विवरणी खंगाली जा रही है। पुलिस को गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों और मुख्य संचालकों तक पहुंचने की उम्मीद है।
एसएसपी हरिद्वार ने कहा कि साइबर अपराधी कहीं भी छिपे हों, पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचकर उन्हें कानून के शिकंजे में लाएगी।