देहरादून। निदेशालय, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखंड में बुधवार को “आयुर्वेद दिवस 2026” का भव्य आयोजन किया गया। “आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ निरोगी जीवन पायें” के संदेश के साथ आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने, आयुर्वेदिक जीवनशैली को बढ़ावा देने और इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आयुर्वेद को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि देश में आयुर्वेद के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो रहा है और सभी राज्य इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में शिक्षा, कौशल विकास और प्रशिक्षण को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निजी क्षेत्र में “आयुर्वेद शिक्षा बोर्ड” की स्थापना के साथ एकीकृत पाठ्यक्रम तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कौशल विकास के लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने देशभर के इच्छुक प्रतिभागियों, विशेष रूप से केरल सहित विभिन्न राज्यों के लोगों को इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा रंजना राजगुरु ने आयुर्वेदिक जीवनशैली को अपनाने पर जोर देते हुए स्वस्थ समाज के निर्माण में इसकी भूमिका रेखांकित की। उन्होंने विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। डॉ. अनुप गक्खड़ ने “जीवनशैली जनित विकारों में आयुर्वेद”, डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने “रिसर्च एंड इनोवेशन इन आयुर्वेद”, वैद्य हर्ष सहगल ने “प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी इन आयुर्वेद”, डॉ. जे.एन. नौटियाल ने “आयुर्वेद में पंचकर्म का महत्व” तथा डॉ. राजीव कुरेले ने “धन्वंतरी पूजन—आयुर्वेद की शाश्वत परंपरा” विषय पर विचार रखे। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं डॉ. आर.पी. सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। अंत में राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी, उत्तराखंड के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।