नीट-यूजी फर्जीवाड़ा: दो और आरोपी गिरफ्तार, 15 एमबीबीएस सीटें रद्द
देहरादून। नीट यूजी के जरिए एमबीबीएस दाखिले में कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े पर देहरादून पुलिस और एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने एक साथ बड़ा शिकंजा कसा है। देहरादून पुलिस की एसआईटी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनके आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के आरोप में दो और आरोपियों संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
दूसरी ओर, एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड राज्य केंद्रीय काउंसलिंग के पहले और दूसरे चरण में अनंतिम रूप से आवंटित 15 सीटें निरस्त कर दी हैं। जिलाधिकारियों से कराए गए दस्तावेज सत्यापन में अधिवास, श्रेणी और उप-श्रेणी से जुड़े दावों में गड़बड़ी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने यह कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, संजय कुमार और गिरीश सिंह ने तीन अभ्यर्थियों—स्वाति, परी और खुशी—के लिए कथित तौर पर आधार कार्ड, अधिवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने में मदद की। आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के एवज में दोनों ने अनुचित धनराशि हासिल की। जांच के दौरान एसआईटी ने संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए। पुलिस के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते भी गलत पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाने और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई।
एसपी ग्रामीण-1 के नेतृत्व में जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। टीम दस्तावेजों की पड़ताल के साथ ही कथित फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों की भूमिका और नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस इससे पहले रुपेश पंडित, अरविंद कुमार और धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। संजय कुमार और गिरीश सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है।
एमबीबीएस की 15 सीटों पर एडमिशन रद्द
इधर, एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने भी प्रवेश प्रक्रिया में दस्तावेजी दावों की जांच के बाद कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय के अनुसार, राज्य केंद्रीय काउंसलिंग में अभ्यर्थियों की पसंद और वरीयता के साथ उनके अधिवास, श्रेणी और उप-श्रेणी से संबंधित दावों के आधार पर अनंतिम सीट आवंटित की गई थीं। प्रवेश के दौरान प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। प्रवेश पाने वाले और FLOAT विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संबंधित संस्थानों के प्रधानाचार्यों और जिलाधिकारियों के माध्यम से सत्यापित कराए गए। जिलों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्टों के आधार पर 15 अनंतिम सीटों को निरस्त कर दिया गया। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सूची में शामिल अभ्यर्थी अब उन्हें आवंटित की गई संबंधित सीट पर अपना दावा नहीं कर सकेंगे।
दस्तावेजी नेटवर्क की जांच तेज
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार कराए गए, इनके पीछे और कौन लोग जुड़े हैं और दाखिले की प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही। एसआईटी का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।