देहरादून। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा साइंस तेजी से बिजनेस मैनेजमेंट, वित्तीय सेवाओं और व्यावसायिक निर्णयों की दिशा बदल रहे हैं। ऐसे में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करने के साथ मानवीय विवेक, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना भी बेहद जरूरी है। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में विशेषज्ञों ने इन मुद्दों पर विचार साझा करते हुए एआई के जिम्मेदार और व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि एआई का उपयोग केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके केंद्र में मानवीय विवेक और नैतिक जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई से जुड़े निर्णय लेते समय मानवीय मूल्यों और सामाजिक हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि तकनीक का विकास समाज के लिए सार्थक और दूरगामी परिणाम दे सके। विशिष्ट अतिथि ग्रिड एनालिटिक्स ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. बिस्वजीत नायक ने कहा कि एआई बिजनेस फोरकास्टिंग को अधिक सटीक और प्रभावी बना रहा है। इससे भविष्य की व्यावसायिक रणनीतियां तैयार करने, संभावित परिस्थितियों का आकलन करने और बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल रही है। उन्होंने बदलते व्यावसायिक परिदृश्य में एआई की बढ़ती भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
एआई के व्यावहारिक उपयोग और चुनौतियों पर चर्चा
तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में एआई और डेटा साइंस की मूल अवधारणाओं, उनके विभिन्न अनुप्रयोगों, एआई आधारित समाधानों के केस स्टडीज और वित्तीय क्षेत्र में इनके इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। संगोष्ठी का उद्देश्य प्रतिभागियों को इन उभरती तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना तथा बिजनेस मैनेजमेंट और वित्तीय सेवाओं में इनके उपयोग की संभावनाओं को समझना रहा। राष्ट्रीय संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई), नई दिल्ली ने किया। समापन समारोह में प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के प्रमुख डॉ. नवनीत रावत और डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के प्रमुख डॉ. एन. एस. बोहरा, ज़ेंडाटारीप टेक्नोलॉजीज़ एलएलपी के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अनूप कुमार, बैंकर एवं म्यूचुअल फंड सलाहकार डॉ. जितेंद्र कुमार राम, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. गिरीश लखेड़ा और डॉ. रत्नाकर मिश्रा सहित डॉ. अंजली डिमरी, डॉ. शैव्या दीक्षित, दीपा वर्मा, मंदीप असवाल और अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं भी मौजूद रहे।
संगोष्ठी में हुई चर्चा ने यह रेखांकित किया कि एआई और डेटा साइंस भविष्य की व्यावसायिक एवं वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, लेकिन इन तकनीकों का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब नवाचार के साथ नैतिकता, मानवीय विवेक और सामाजिक हितों का संतुलन बनाए रखा जाएगा।