– गोबर आधारित उत्पाद निर्माण और पोल्ट्री पालन का प्रशिक्षण
– जनजातीय एवं ग्रामीण समुदायों को मिलेगा रोजगार का नया अवसर
देहरादून। अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (एसीआईसी) उत्तरांचल यूनिवर्सिटी फाउंडेशन ने ग्रामीण और जनजातीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दो आजीविका आधारित कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए हैं। आदर्श युवा समिति और अर्पण (एसोसिएशन फॉर रूरल प्लानिंग एंड एक्शन) के सहयोग से आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं और युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण, उद्यमिता की जानकारी और सरकारी योजनाओं से जोड़कर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
पहले कार्यक्रम के तहत हरिद्वार के लालढांग में पर्यावरण-अनुकूल गोबर आधारित उत्पादों पर पांच दिवसीय कौशल विकास एवं उद्यमिता प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें जनजातीय महिलाओं और युवाओं को गोबर से दीये, अगरबत्ती, गमले, हवन सामग्री और जैविक खाद जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की जानकारी भी दी गई, ताकि प्रतिभागी अपने स्वयं के सूक्ष्म उद्यम स्थापित कर सकें। दूसरी पहल के तहत पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट स्थित लोहरगांव में “महिला कृषकों की आजीविका संवर्धन” विषय पर एक सप्ताह का पोल्ट्री फार्मिंग प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की करीब 50 महिला किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक और कम लागत वाली पोल्ट्री खेती को आय का स्थायी स्रोत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
तकनीकी सत्र में डॉ. कमल पंत ने प्रतिभागियों को उपयुक्त नस्ल चयन, चूजा प्रबंधन, कम लागत वाले पोल्ट्री शेड, संतुलित आहार, टीकाकरण, जैव सुरक्षा और रोग प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उत्तरांचल विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं नवाचार निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमी समाज और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं तथा जनजातीय समुदायों की भागीदारी सराहनीय है। इस अवसर पर एसीआईसी उत्तरांचल यूनिवर्सिटी फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अनीता गेहलोत, भारत सरकार के एमएसएमई विभाग के निदेशक सुभाष चंद्र, डॉ. रामकृष्णन तथा डॉ. ईशा आहूजा बत्रा भी मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि नवाचार, उद्यमिता और संस्थागत सहयोग के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के जरिए समावेशी ग्रामीण विकास और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देता रहेगा।