– मोहन ने शास्त्रीय संगीत को दिया नया आयाम: नरेंद्र सिंह नेगी
देहरादून। सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल (एसबीपीएस) में शनिवार की शाम शास्त्रीय संगीत के नाम रही। स्कूल के संगीत सभागार में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात संगीतज्ञ पंडित मोहन सिंह रावत ने संतूर वादन कर श्रोताओं के दिलों को झंकृत कर दिया। उनके साथ तबले पर संतोष पांचाल और तानपुरे पर हर्षवर्द्धन भट्ट ने दिया। इस मौके पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने शॉल ओढ़ाकर मोहन रावत का स्वागत किया। गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने मोहन रावत की संगीत साधना की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोहन रावत बहु-वाद्य संगीतज्ञ हैं। उन्होंने पौड़ी में रहते हुए भी देश दुनिया में शास्त्रीय संगीत को नया आयाम दिया है।

एसबीपीएस म्यूजिक हॉल में आयोजित इस संगीतमय संध्या में पंडित मोहन रावत ने इस दौरान राग खमाज, राग पहाड़ी, राग अहीर भैरव, राग दुर्गा की प्रस्तुतियां देकर श्रेताओं का दिल जीत लिया। गौरतलब है कि पंडित मोहन रावत ने महज तीन साल की उम्र से ही संगीत साधना शुरू कर दी थी। वह भातखंडे संगीत महाविद्यालय में शिक्षक हैं। हाल में उन्होंने ‘कलासिक बैंजो‘ का आविष्कार किया और इसे केंद्र सरकार के नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने मान्यता दे दी है। क्लासिकल बैंजो हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के सूक्ष्म स्वरों और राग-रागनियों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त माना गया है।
बलूनी ग्रुप के एमडी विपिन बलूनी ने पंडित मोहन रावत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में पंडित मोहन रावत की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है कि पंडित मोहन रावत के क्लासिकल बेंजों को बिस्मिल्लाह खान की शहनाई, शिवकुमार शर्मा के संतूर और विश्व मोहन भट्ट की मोहन वीणा जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों की तरह देखा जाता है। प्रख्यात संगीतज्ञ पंडित मोहन रावत ने बलूनी ग्रुप के एमडी विपिन बलूनी द्वारा संस्कृति के संरक्षण में किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत के प्रति प्रेरित करने का यह प्रयास अनुकरणीय है। इस मौके पर प्रो. डीआर पुरोहित, कुलानंद घनसाला, ऊषा नेगी, कविलास नेगी, मदन डुकलान, पूर्व सीओ ढौडियाल, नीतीश बलूनी सहित कई प्रमुख लोग, छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्टाफ मौजूद था।
